प्रदेश भर के 5446 गो-आश्रय स्थलों में लगाए गए 7592 सीसीटीवी कैमरेआमतौर पर तो यह मान लिया जाता है कि पशु को तो कहीं भी कैसे भी बांध दो. लेकिन एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक ये सोचना गलत है. जैसे इंसान अपना मकान बनाते वक्त दिशाओं का ख्याल रखता है तो ऐसे ही एनिमल शेड बनाते वक्त भी दिशाओं का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. यहां तक की पशु जिस नांद में भूसा और चारा खाते हैं तो उसकी भी लम्बाई-चौड़ाई के साथ ही ये भी देखना होता है कि वो किस दिशा में बनी है. अगर ऐसा नहीं किया तो फिर पशु यानि गाय-भैंस न तो ठीक से खाएंगे और न ही आराम के साथ उस शेड में रह पाएंगे.
और जब ये सब नहीं होगा तो फिर इसका सीधा असर पशुओं के दूध उत्पादन और उनकी हैल्थ पर पड़ेगा. एक्सपर्ट की मानें तो पशु फिर वो चाहें गाय-भैंस हो या फिर भेड़-बकरी, अगर वो खुश है और आराम से रह रहा है तो उसका दूध और मीट उत्पादन कभी नहीं घटता है. बल्कि अच्छे वातावरण में रहने के चलते उसका उत्पादन बढ़ जाता है.
लंबाई (Length)
उत्तर-दक्षिण (North-South) यह दिशा शेड की लंबाई के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है.
चौड़ाई (Width)
पूर्व-पश्चिम (East-West) यह दिशा शेड की चौड़ाई के लिए अच्छी मानी जाती है.
स्थानीय जलवायु, भू-आकृति और उपलब्ध जगह के मुताबिक शेड की दिशा में हल्का बदलाव किया जा सकता है, लेकिन शेड की लंबाई उत्तर-दक्षिण और चौड़ाई पूर्व-पश्चिम में रखना सबसे अच्छा माना जाता है.
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