FMD Free Zone: हम खुरपका-मुंहपका (FMD) को कंट्रोल करने के करीब है- मीनेश शाह

FMD Free Zone: हम खुरपका-मुंहपका (FMD) को कंट्रोल करने के करीब है- मीनेश शाह

FMD Free Zone कुछ देश एफएमडी फ्री घोषित हो चुके हैं. क्योंकि अभी तक इस बीमारी के इलाज के नाम पर सिर्फ वैक्सीन है. एफएमडी के वैक्सीनेशन से सरकार का करोड़ों रुपया खर्च हो जाता है. ये वायरस से होने वाली बीमारी है तो इसके सक्रिय होने और फैलने का कोई तय वक्त नहीं है. केन्द्र सरकार पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर नौ राज्यों में एफएमडी फ्री जोन बनाने की तैयारी में लगी हुई है.

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FMD Free Zone: हम खुरपका-मुंहपका (FMD) को कंट्रोल करने के करीब है- मीनेश शाहपंजाब मिल्‍कफेड ने पशुचारे के‍ लिए एनडीडीबी से मांगी मदद (सांकेतिक तस्‍वीर)

दूध उत्पादन में नंबर वन होने के बाद भी अगर हम डेयरी एक्सपोर्ट में पीछे हैं तो उसकी एक बड़ी वजह है खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी. एफएमडी खुर वाले पशुओं की जानलेवा बीमारी है. ये बीमारी उन पशुओं को होती है जिनके खुर होते हैं और खुर के बीच में जगह होती है. दुनिया के ज्यादातर देश इस बीमारी से परेशान हैं. इस बीमारी से पीडि़त पशु के प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से इंसानों में भी कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं. इसलिए डेयरी प्रोडक्ट इंपोर्ट करने वाले देश इसे लेकर अलर्ट रहते हैं. 

भारत का डेयरी प्रोडक्ट भी इससे प्रभावित हो रहा है. नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह की मानें तो देश एफएमडी को कंट्रोल करने के करीब है. जल्द ही वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एनिमल हेल्थ (WOAH) को प्रस्ताव भेजा जाएगा. एनडीडीबी एनिमल हसबेंडरी मंत्रालय के साथ मिलकर शुरुआत में 9 राज्यों को एफएमडी फ्री जोन बनाने पर काम कर रहा है. 

ये 9 राज्य बनेंगे एफएमडी फ्री जोन  

बीते कुछ वक्त पहले दिल्ली में पशुओं के टीकाकरण को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम में ही जानकारी दी गई थी कि सीरो-सर्विलांस के आधार पर कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात को एफएमडी फ्री जोन बनाने का आकलन किया गया है. इसी के चलते एनिमल प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद मिलेगी.

ये हैं एफएमडी के लक्षण 

  • पशु को 104 से 106 एफ तक तेज बुखार आएगा. 
  • एफएमडी पीडि़त पशु की भूख कम हो जाएगी. 
  • एफएमडी से पीडि़त पशु सुस्त रहने लगता है. 
  • पशु के मुंह से बहुत ज्यादा लार टपकना शुरू हो जाती है. 
  • मुंहपका हो जाते हैं अंदर और बाहर फफोले हो जाते हैं. 
  • खासतौर पर पशु के जीभ-मसूड़ों पर फफोले हो जाते हैं. 
  • पशु के पैर में खुर के बीच वाली जगह में घाव हो जाते हैं. 
  • अगर पशु गाभिन है तो उसका गर्भपात हो जाता है. 
  • पशु के थन में सूजन आने से दूध देने में परेशानी होती है.
  • एफएमडी पशु में बांझपन की बीमारी की वजह भी है. 

पशुओं में एफएमडी फैलने के कारण    

  • बरसात के दौरान दूषित चारा और दूषित पानी पीने से. 
  • बरसात के दौरान खुले में चरने से भी फैलता है. 
  • खुले में पड़ी सड़ी-गली चीजें खाने से भी होता है. 
  • फार्म पर आने वाला नया पशु पीडि़त है तो उससे लग जाती है. 
  • एफएमडी पीड़ित पशु के साथ रहने से हो जाती है. 

ये काम किए तो कंट्रोल होगी एफएमडी 

  • पशु पीडि़त हो या नहीं उसका रजिस्ट्रेशन कराएं. 
  • पशु की ईयर टैगिंग जरूर करवाएं. 
  • पशु को साल में दो बार एफएमडी का टीका लगवाएं. 
  • सभी सरकारी केन्द्र पर टीका फ्री लगाया जाता है. 
  • पशु के बैठने-खड़े होने की जगह को साफ और सूखा रखें. 

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