उत्तर प्रदेश में हरा चारा बढ़ाने की तैयारी में जुटा पशुपालन विभागसर्दियों में पशुओं के लिए हरे चारे का इंतजाम करना अपने आप में एक परेशानी वाला काम होता है. ऐसा नहीं है कि इस मौसम में हरा चारा नहीं होता है. चारा तो होता है, लेकिन उसे सीधे पशुओं को नहीं खिलाया जा सकता है. साथ ही एक ऐसे चारे की जरूरत होती है जो सर्दियों के मौसम में पूरा पोषण दे. यही वजह है कि चारा एक्सपर्ट सर्दियों के लिए सितम्बर में ही दलहनी चारा लगाने की सलाह देते हैं. साथ ही ये भी सलाह दी जाती है कि दलहनी चारे के साथ एक खास तरह की घास भी लगाई जाए.
घास के रूप में ऐसा चारा लगाया जाए तो एक बार लगाने के बाद लम्बे वक्त तक उपज दे. बैलेंस डाइट के लिए ऐसा करना जरूरी हो जाता है. एनिमल न्यूट्रीशन एक्सपर्ट की मानें तो पशु को अगर बैलेंस डाइट मिलती है तो उसके दूध की क्वालिटी सुधरने के साथ ही उत्पादन भी बढ़ता है. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि एक्सपर्ट ने बोल दिया तो पशुओं को सिर्फ दलहनी चारा ही खिलाएं. सर्दियों में दलहनी चारा कैसे खिलाना है एक्सपर्ट ये टिप्स भी देते हैं.
चारा एक्सपर्ट बताते हैं कि हरे चारे की एक फसल कम से कम ऐसी होनी चाहिए जो एक बार लगाने के बाद कई साल तक उपज दे. जैसे नेपियर घास को बहुवर्षिय चारा कहा जाता है. बहुवर्षिय चारा वो होता है जो एक बार लगाने के बाद लम्बे वक्त तक उपज देता है. नेपियर घास भी उसी में से एक है. एक बार नेपियर घास लगाने के बाद करीब पांच साल तक हरा चारा लिया जा सकता है. लेकिन ऐसा भी नहीं किया जा सकता है कि पशुओं को सिर्फ नेपियर घास ही खिलाते रहें.
अगर आप पशु को नेपियर घास दे रहे हैं तो उसके साथ उसे दलहनी चारा भी खिलाएं. इसके लिए सितम्बर में नेपियर घास के साथ लोबिया लगाया जा सकता है. हर मौसम में आप नेपियर के साथ सीजन के हिसाब से दूसरा हरा चारा लगा सकते हैं. ऐसा करने से पशु को नेपियर घास से कर्बोहाइड्रेड है तो लोबिया से प्रोटीन और दूसरे मिनरल्स मिलते हैं. और इसी तरह की खुराक से भेड़-बकरी में मीट की ग्रोथ होती है तो गाय-भैंस में दूध का उत्पादन बढ़ता है.
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