
The initiative will focus on creating awareness among youths about the protection and care of cattle, and their social and economic importance.मैनेज इंस्टीट्यूट, हैदराबाद की सर्वे रिपोर्ट है कि जो किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन करते हैं वो सुसाइड नहीं करते हैं. महाराष्ट्र, राजस्थान और तमिलनाडू में ये सर्वे हो चुका है. यही वजह है कि 'मन की बात' कार्यक्रम में पीएम नरेन्द्र मोदी भी किसानों को खेती संग पशुपालन का मंत्र दे चुके हैं. किसानों को पशुपालन में किसी भी तरह की कोई परेशानी न आए इसके लिए पीएम के विजन वाली नेशनल लाइव स्टॉक योजना (NLM) शुरू की जा चुकी है. इस योजना में ऐसे पशुओं को शामिल किया गया है जिन्हें पालकर कुछ कमाई होती है. लेकिन पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का ही एक विभाग इस योजना पर पर्देदारी में जुटा हुआ है. एनएलएम योजना की जिम्मेदारी इसी विभाग को दी गई है.
केन्द्र और राज्य सरकारों के विभाग जहां योजना की कामयाबी के बारे में बताते हुए थकते नहीं हैं, बैनर-पोस्टर लगाए जाते हैं. कई दूसरे माध्यमों से योजना के बारे में बताते हुए जनता को जागरुक किया जाता है, वहीं ये विभाग पीएम के विजन वाली योजना पर पर्दा डाल रहा है. कितनी महिलाओं ने योजना का लाभ लिया ये ही बताने को तैयार नहीं है. किस राज्य से कितने युवा पीएम की एनएलएम योजना का लाभ उठा रहे हैं ये भी बताने को तैयार नहीं है. इस बारे में जब सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से जानकारी चाही तो तरह-तरह के अटपटे जवाब विभाग की ओर से दिए जाने लगे.
30 जून, 2026 को एनिमल हसबेंडरी, डेयरी और फिशरीज विभाग में एक आरटीआई भेजी गई थी. आरटीआई में एनएलएम के लिए आने वाले आवेदनों की संख्या, किस पशुपालन के लिए कितने आवेदन आए और योजना का लाभ लेने वाले कौन थे ये जानकारी चाही गई थी. जिस पर विभाग ने 13 जुलाई को जवाब देते हुए कहा कि प्रोजेक्ट अप्रूवल कमिटी (PAC) की बैठकों का विवरण जल्द ही NLM-EDP पोर्टल पर उपलब्ध करा दिया जाएगा. विवरण अपलोड होने के बाद, आपके द्वारा मांगी गई जानकारी पोर्टल से प्राप्त की जा सकेगी. यानि साल 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की जानकारी अभी तक अपलोड नहीं की गई. अब इसके पीछे क्या वजह रही होगी, ये तो विभाग ही बता सकता है.
इस जवाब के मिलते ही तीन अगस्त को प्रथम अपील के माध्यम से विभाग से पूछा गया कि संबंधित दस्तावेज पोर्टल पर कब तक अपलोड कर दिए जाएंगे. 13 अगस्त को विभाग का जवाब आया कि दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए हैं. लेकिन, जब पोर्टल पर चेक किया तो संबंधित दस्तावेज अपलोड नहीं किए गए थे. इस बारे में जब फोन कर संबंधित अधिकारी से अपलोड न करने के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि कुछ तकनीकी खराबी के चलते अपलोड नहीं कर पाए हैं.

14 अगस्त, 2026 को एक बार फिर से आरटीआई दाखिल की गई है. 21 अगस्त जवाब आ गया. जवाब में कहा गया कि मांगी गई जानकारी विभाग के पास मौजूद है, लेकिन, यह उस खास फ़ॉर्मेट या संकलन में नहीं है जैसा आरटीआई में मांगा गया है. और आरटीआई एक्ट के तहत पब्लिक अथॉरिटी के लिए ऐसी जानकारी बनाना या तैयार करना ज़रूरी नहीं है जो उसके रिकॉर्ड का हिस्सा न हो. साथ ही विभाग ने आरटीआई एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता है.
विभाग को 21 अगस्त को एक और आरटीआई भेजी गई. आरटीआई में ये कहा गया कि विभाग के पास जिस फार्मेट में जानकारी का संकलन है उसी फार्मेट में आवेदक को दे दी जाए. अच्छी बात ये है कि विभाग ने इस बार तीन दिन में ही इसका जवाब दे दिया. अब विभाग के पास जब कोई नहीं जवाब नहीं बना तो पुराना ही जवाब दोहराते हुए कहा कि योजना का लाभ लेने वाले लोगों की पूर्ण जानकारी नहीं दी जा सकती है.

इस विभाग में बड़े बॉस हैं एनिमल हसबेंडरी कमिश्नर डॉ. नवीन बी. महेश्वरप्पा. जब इस सारे मामले में पर उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया तो उठा नहीं. मैसेज किया, ईमेल भी किया, लेकिन जवाब नहीं आया. अब ज्वाइंट सेक्रेटरी एनएलएम और एसडी को भी इस मामले में ईमेल किया गया है. जिसके जवाब का इंतजार है.
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