सूखे में पशुओं के चारे का संकटमहाराष्ट्र के मराठवाड़ा में सूखे के कारण किसानों के सामने पानी और पशुओं के चारे का संकट बढ़ता जा रहा है. इस बीच बीजेपी विधायक बबनराव लोनिकर ने राज्य सरकार से क्षेत्र में पैदा होने वाले गन्ने की सीधे खरीद कर उसे चीनी मिलों में भेजने के बजाय पशुओं के चारे के लिए इस्तेमाल करने की मांग की है. उन्होंने सरकार से चारा शिविर शुरू करने और किसानों को दिन में लगातार बिजली देने की भी मांग की है.
मराठवाड़ा में बारिश की कमी के कारण सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है. इसका असर खेती के साथ-साथ पशुपालन पर भी पड़ रहा है. किसानों के सामने अपने पशुओं के लिए पर्याप्त चारा जुटाना मुश्किल हो रहा है. इसे देखते हुए जालना जिले के बीजेपी विधायक बबनराव लोनिकर ने महाराष्ट्र सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग की है. लोनिकर ने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को पत्र लिखकर कहा है कि मराठवाड़ा में पैदा होने वाले गन्ने की सरकार सीधे खरीद करे. इसके बाद इस गन्ने को चीनी मिलों में भेजकर पेराई करने के बजाय पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाए. उनका कहना है कि इससे चारे की कमी से परेशान किसानों को तुरंत राहत मिल सकती है.
बीजेपी विधायक ने सरकार से सूखा प्रभावित इलाकों में चारा शिविर शुरू करने की भी मांग की है. उनका कहना है कि पानी और चारे की कमी के कारण किसानों के साथ उनके पशुधन पर भी संकट बढ़ रहा है. ऐसे में सरकार को किसानों और पशुओं की जरूरत को देखते हुए जल्द राहत देनी चाहिए. उन्होंने खेती के काम के लिए दिन में 8 से 10 घंटे लगातार बिजली देने की मांग भी की है. इससे किसान उपलब्ध पानी का इस्तेमाल खेती और चारा उगाने के लिए कर सकेंगे.
लोनिकर ने सिंचाई परियोजनाओं के बांधों से कुछ पानी का इस्तेमाल चारा उगाने के लिए करने की अनुमति देने की भी मांग की है. हालांकि, उन्होंने कहा कि इसमें पीने के पानी की जरूरत को सबसे पहले रखा जाना चाहिए. उनका सुझाव है कि जहां पानी की सीमित उपलब्धता है, वहां उसका इस्तेमाल सावधानी से करते हुए बड़े स्तर पर पशुओं के लिए चारा तैयार किया जा सकता है.
बीजेपी विधायक ने परतूर-मंठा विधानसभा क्षेत्र में लोअर दूधना परियोजना के आसपास करीब 3,000 हेक्टेयर ऐसी जमीन पर चारा उगाने का सुझाव दिया है, जहां गाद जमा होने के कारण जमीन का इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इसी तरह राज्य की दूसरी सिंचाई परियोजनाओं के आसपास मौजूद जमीन का भी इस्तेमाल बड़े स्तर पर चारा उगाने के लिए किया जा सकता है. इससे सूखे के समय पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है.
लोनिकर ने कृषि विभाग के जरिए किसानों को तेजी से बढ़ने वाली चारा फसलों के बीज मुफ्त देने की मांग भी की है. उन्होंने मक्का और ज्वार जैसी फसलों के बीज बांटने का सुझाव दिया है. उनके मुताबिक, मक्का और ज्वार जैसी चारा फसलें कम पानी में भी तेजी से बढ़ सकती हैं. इन फसलों की ऊंचाई तीन महीने या उससे कम समय में करीब 10 से 12 फीट तक हो सकती है. इससे किसानों को कम समय में पशुओं के लिए चारा मिल सकता है.
महाराष्ट्र सरकार ने बारिश की कमी के बीच राज्य के 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किया है. यह राज्य के करीब 74 प्रतिशत तालुकों के बराबर है. सरकार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत उपायों की घोषणा भी की है. अब लोनिकर ने राजस्व मंत्री से जालना जिले और पूरे मराठवाड़ा में पानी और चारे की समस्या को देखते हुए प्रशासन को तुरंत निर्देश देने की मांग की है. उनका कहना है कि समय रहते कदम उठाने से किसानों और उनके पशुओं को बड़ी राहत मिल सकती है. (PTI)
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