महाराष्ट्र के बीड में सूखे का संकटमहाराष्ट्र के बीड जिले, खासकर आष्टी तालुका में बारिश नहीं होने से सूखे की स्थिति गंभीर हो गई है. खेतों में खड़ी फसलें सूख चुकी हैं और किसानों के सामने आजीविका के साथ-साथ अपने मवेशियों को बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. जिले के कई इलाकों में चारे का संकट गहराता जा रहा है, जिससे किसान परिवारों की चिंता बढ़ गई है.
स्थानीय महिला किसान विमल शेल्के ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि घर में केवल दो दिन का चारा बचा है. उन्होंने कहा कि जब बेजुबान जानवर भूखे होकर उनकी तरफ देखते हैं तो खाना तक नहीं खाया जाता. बढ़ती महंगाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी सहायता के बावजूद परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है.
महिला किसान विमल शेल्के ने सरकार से गुहार लगाई है कि हालात देखकर जानवरों के लिए चारा और पानी की व्यवस्था की जाए. गाय और भैंस जैसे मवेशियों को चारा नहीं मिल रहा है, इसलिए मुंह नीचे करके बैठे हैं. आज महंगाई इतनी बढ़ गई है कि घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है. चीनी के भाव बढ़ चुके हैं और 80 रुपये तक रेट हो गया है. फली का बीज 160 रुपये किलो हुआ हैं, ऐसे में हम लोग कैसे जिएंगे. सरकार ने लड़की बहिनों को 1500 रुपये दिए हैं, लेकिन इतनी महंगाई में 1500 रुपये में क्या होगा. हमें यह योजना नहीं चाहिए, हमें मवेशियों के लिए चारा चाहिए. इन जनवरों की हालत देख कर हमें रोना आ रहा है.
किसान सभा के प्रदेश महासचिव नारायण गोले ने सरकार से तत्काल राहत उपाय लागू करने की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो किसान सड़क पर उतरकर आंदोलन तेज करेंगे.
किसान संगठनों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं. इनमें सभी किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी, फसल नुकसान पर प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की सहायता, मवेशियों के लिए सरकारी चारा छावनियों की शुरुआत, विद्यार्थियों की स्कूल और कॉलेज फीस माफी और बैंकों की कर्ज वसूली पर रोक शामिल है.
किसान सभा के प्रदेश महासचिव नारायण गोले ने सरकार को सीधे तौर पर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को सड़कों पर नहीं घूमने दिया जाएगा. किसान संगठन और स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार की ओर से चुने गए लाभार्थी किसानों के बजाय 100% किसानों का कर्ज पूरी तरह माफ करने की मांग की. फसल नुकसान के लिए प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता की मांग की. मांग में कहा गया है कि मवेशियों को भुखमरी से बचाने के लिए तुरंत सरकारी चारा छावनियां शुरू की जाएं. सूखा प्रभावित किसानों के बच्चों की स्कूल और कॉलेज फीस माफ की जाए. बैंकों द्वारा की जा रही जबरन कर्ज वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए.
ग्रामीणों का कहना है कि जिले में कई कुएं और बोरवेल सूख चुके हैं, जबकि सोयाबीन जैसी प्रमुख खरीफ फसलें लगभग पूरी तरह नष्ट हो गई हैं. ऐसे में किसानों की नजर अब सरकार के राहत पैकेज और त्वरित हस्तक्षेप पर टिकी हुई है.
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