सड़क पर जातीं गाय. प्रतीकात्मक फोटोमध्य प्रदेश, यूपी और हरियाणा में राजस्थान बार्डर से लगी सड़कों पर अक्सर हमे भेड़ और गायों के झुंड नजर आते हैं. इनके साथ लाल पगड़ी में चरवाहे भी होते हैं. साल में कई महीनों तक ये लोग घरों से दूर अपने पशुओं को चराते हुए एक राज्य से दूसरे राज्य में घूमते रहते हैं. इन्हें खानाबदोश चारवाह (घुमंतू चरवाहे) भी कहा जाता है. ये चलती-फिरती डेयरी ही इनकी जिंदगी का अहम हिस्सा होती है. लेकिन अच्छी बात ये है कि इस बार हो रही पशुगणना में खानाबदोश चरवाहों की भी गिनती हो रही है.
इनके झुंड में मौजूद पशुओं को भी गिना जा रहा है. गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में खानाबदोश चरवाहों की जातियां पाई जाती हैं. गौरतलब रहे हर पांच साल में एक बार पशुगणना (Livestock Census) होती है. 20वीं पशुगणना साल 2019 में हुई थी. अब 21वीं पशुगणना हो रही है. पशुगणना में गिनती के दौरान मवेशी, भैंस, मिथुन, याक, भेड़, बकरी, सुअर, घोड़ा, टट्टू, खच्चर, गधा, ऊंट, कुत्ता, खरगोश और हाथी के बारे में जानकारी जमा की जा रही है.
सरकार खुरपका-मुंहपका रोग पर काबू पाने के लिए हर एक पशु तक अपनी पहुंच बढ़ा रही है. इस कोशिश में विभाग लक्ष्य के काफी करीब तक पहुंच चुके हैं. लेकिन एक ठिकाना न होने के चलते खानाबदोश इस अभियान में पीछे छूट जाते हैं. पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने आंकड़े जारी करते हुए बताया कि इंफेक्शन वाली 66 फीसद बीमारी जानवरों से इंसानों में होती है. 75 फीसद बीमारी ऐसी हैं जिसका कारण पशु हैं. इस खतरे पर काबू पाने के लिए भी मंत्रालय ने खानाबदोश समुदाय के संबंध में यह योजना शुरू की है.
पशुपालन करने वाले खानाबदोशों को भेड़-बकरी समेत सभी तरह के पशुओं के लिए किसान केडिट कार्ड की सुविधा भी दी जाएगी. खानाबदोश समुदाय को पशुपालन मंत्रालय की ओर से जारी सभी योजनाओं का फायदा मिलता रहे इसके लिए सरकार ने खानाबदोश प्रकोष्ठ का गठन किया है.
पशुपालन मंत्रालय ने देश के करीब 12 राज्यों से खानाबदोश समुदाय के बारे में जानकारी मांगी थी. इस लिस्ट में शामिल राज्यों में यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, ओड़िशा, आंध्रा प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को पत्र भेजकर मंत्रालय ने सभी जानकारी मांगी हैं. मंत्रालय के मुताबिक राज्यों से खानाबदोश की आबादी के बारे में जानकारी, उनकी संख्या, उनके पास पशु कौन से हैं, पशुओं की संख्या , सर्वे के दौरान जहां रह रहे हैं उस रोड का नाम, अनुमानित उत्पादन, बिक्री का तरीका, अगर किसी योजना का फायदा ले रहे हैं तो उसकी जानकारी. मंत्रालय द्वारा मार्च में दी गई जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड, लद्दाख, राजस्थान, हिमाचल, कर्नाटक, सिक्किम और जम्मू-कश्मीर राज्यो ने खानाबदोश समुदाय के बारे में जानकारी दे दी थी.
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