Cow-Buffalo Journey: गाय-भैंस को कहीं दूर से खरीदकर ला रहे हैं तो बाड़े में पहले से कर लें ये इंतजाम Cow-Buffalo Journey: गाय-भैंस को कहीं दूर से खरीदकर ला रहे हैं तो बाड़े में पहले से कर लें ये इंतजाम
Cow-Buffalo Journey देश के अलग-अलग हिस्सों से गाय-भैंस की खरीद-फरोख्त होती है. 500 से 700 किमी तक की दूरी पशुओं को ट्रक में खड़े-खड़े ही पूरी करनी होती है. जिसके चलते पशु तनाव में आ जाता है. ऐसा होने पर पशु बीमार पड़ सकता है. साथ ही उसका दूध उत्पादन भी घट जाता है. इसलिए जरूरी है कि पशुओं के डेयरी फार्म पर पहुंचने के बाद एक्सपर्ट के बताए उपाय जरूर अपनाएं जाएं.
कानपुर में गाय-बछड़ों को पहनाए गए कोट. (Photo: Screengrab)नासिर हुसैन - New Delhi,
- Jan 15, 2026,
- Updated Jan 15, 2026, 12:56 PM IST
Cow-Buffalo Journey पंजाब-हरियाणा से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड-बिहार और तमिलनाडू तक गाय-भैंस जाती हैं. कुछ वक्त पहले तक ट्रेन से गाय-भैंस भेजी जाती थीं. लेकिन बाद में इस सुविधा को बंद कर दिया गया. अब ट्रक से पशु कारोबारी गाय-भैंस को दक्षिण भारत के राज्यों तक ले जाते हैं. हैरान करने वाली बात ये है कि इस दौरान सैकड़ों किमी की दूरी गाय-भैंस खड़े-खड़े ही तय करती हैं. बीच में कहीं एक-दो जगह जरूर उन्हें ट्रक से उतारकर आराम कराया जाता है. लेकिन बहुत सारे पशुपालक तो ये भी नहीं करते हैं.
जिसके चलते पशुओं के बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है. उनका दूध उत्पादन भी घट सकता है. ऐसे में एनिमल एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि पशु की यात्रा के दौरान और डेयरी फार्म पर पहुंचने के बाद एक्सपर्ट के बताए कुछ जरूरी काम बाड़े में जरूर कर लें. पशुओं को लंबी यात्रा कराने के बाद ये जरूरी है कि उन्हें बीमारी और तनाव से बचाने के लिए कुछ उपाय अपनाए जाएं. एनिमल एक्सपर्ट भी पशुओं की यात्रा के दौरान और उसके बाद से संबंधित एडवाइजरी भी जारी करते हैं.
पशु यात्रा से लौटें तो करें ये जरूरी काम
- यात्रा से आते ही पशुओं को 12-24 घंटे के लिए साफ, छायादार और शांत जगह पर रखें.
- आने वाले पशुओं को साफ और ताजा पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स पाउडर मिलाकर दें.
- यात्रा करके आने वाले पशुओं को शेड में दूसरे पशुओं से अलग रखें.
- कोशिश करें कि यात्रा से आने वाले पशुओं को क्वारंटीन क्षेत्र में रखें.
- पशुओं को क्वारंटीन क्षेत्र में रखने से शेड में बीमारी फैलने का खतरा नहीं रहता है.
- यात्रा से आने वाले पशुओं को मुलायम घास ही खाने के लिए दें.
- यात्रा से आते ही पशुओं को पहले दिन भारी अनाज या उच्च प्रोटीन वाले चारे से बचें.
- आने वाले नए पशु के शरीर पर लगी चोट वगैरह चेक कर लें.
- पशु की जांच करा लें उसे कोई बीमारी तो नहीं है.
- खांसी, नाक से पानी आना, लंगड़ाना, पेट फूलना, कमजोरी आदि पर ध्यान दें.
- इम्यूनिटी और भूख बढ़ाने के लिए स्ट्रेसमिक्स, विटालाइट या अमीनोविटा दिया जा सकता है.
- आने के 24 से 48 घंटे बाद टिक्स, जूं और मक्खियों को नियंत्रित करने के लिए स्प्रे करें.
- आने के तीन से सात दिनों के बाद डॉक्टर की सलाह पर कृमिनाशक दवाई दें और टीकाकरण कराएं.
निष्कर्ष-
पशुओं की लंबी यात्रा के बाद एक्सपर्ट के बताए उपाय तो अपनाए ही जाने चाहिए, साथ में यात्रा के दौरान भी कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए. जिस वाहन से पशु को यात्रा कराई जा रही है उसमे पशु के खड़े होने और उसके हिलने-ढुलने के लिए पूरी जगह होनी चाहिए. यात्रा ज्यादा लंबी हो तो बीच में पशु को ब्रेक देना चाहिए.