सोयामील की मांग में सुधारसोयामील सोयाबीन से बनने वाला एक पोषक आहार है, जिसे मुर्गी, मछली और पशुओं के खाने में इस्तेमाल किया जाता है. इसमें प्रोटीन ज्यादा होता है, जिससे मुर्गियां जल्दी और स्वस्थ बढ़ती हैं. यही कारण है कि पोल्ट्री फार्म वाले सोयामील को बहुत पसंद करते हैं. हाल के दिनों में पोल्ट्री सेक्टर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. इसी वजह से पोल्ट्री फीड बनाने वाली कंपनियां ज्यादा सोयामील खरीद रही हैं. सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के मुताबिक, फीड सेक्टर से सोयामील की मांग में सुधार देखने को मिला है. SOPA के कार्यकारी निदेशक डी.एन. पाठक ने बिजनेस लाइन को बताया कि पोल्ट्री सेक्टर के अच्छा चलने से सोयामील की खपत बढ़ी है.
हालांकि सोयामील की मांग बढ़ रही है, लेकिन एक चिंता भी है. पोल्ट्री फीड में अब डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्यूबल्स (DDGS) का इस्तेमाल बढ़ रहा है. यह एक सस्ता विकल्प है, जो अनाज से बनने वाले एथनॉल का उत्पाद होता है. DDGS सस्ता होने के कारण कुछ कंपनियां इसे ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे सोयामील की मांग पर असर पड़ सकता है.
SOPA के अनुसार, दिसंबर महीने में सोयामील की खपत 5 लाख टन रही, जो पिछले महीने के बराबर थी. अक्टूबर से दिसंबर 2025-26 के तेल वर्ष में फीड सेक्टर से कुल खपत 16 लाख टन रही, जो पिछले साल की इसी अवधि में 17 लाख टन थी. खाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सोयामील की मांग भी थोड़ी कम रही. इस अवधि में इसकी खपत 2.05 लाख टन रही, जबकि पिछले साल यह 2.10 लाख टन थी.
इस दौरान सोयामील का उत्पादन 23.67 लाख टन रहा, जो पिछले साल से थोड़ा कम है. बाजारों में सोयाबीन की आवक 43 लाख टन रही, जबकि पिछले साल यह 46 लाख टन थी. क्रशिंग यानी सोयाबीन को पीसने की मात्रा भी थोड़ी कम होकर 30 लाख टन रही. दिसंबर के अंत तक सोयामील का स्टॉक 1.73 लाख टन और सोयाबीन का स्टॉक 66.53 लाख टन आंका गया.
भारत से सोयामील का निर्यात भी हो रहा है. अक्टूबर से दिसंबर 2025-26 में कुल निर्यात 5.07 लाख टन रहा. यूरोप के देश इस सोयामील को ज्यादा खरीद रहे हैं. फ्रांस और जर्मनी सबसे बड़े खरीदार रहे. इनके अलावा बांग्लादेश, नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात ने भी भारतीय सोयामील खरीदा.
SOPA ने 2025-26 तेल वर्ष के लिए सोयाबीन का उत्पादन 105.36 लाख टन होने का अनुमान लगाया है. अगर पोल्ट्री सेक्टर इसी तरह आगे बढ़ता रहा, तो सोयामील की मांग और बढ़ सकती है. इससे किसानों, व्यापारियों और उद्योग सभी को फायदा होगा.
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