भेड़ की इन नस्लों का करें पालनभेड़ और बकरे-बकरियों की डिमांड दिन-रात बढ़ रही है. अकेले भेड़ की ही बात करें तो कश्मीर और दक्षिण भारत के कई राज्य दूसरे राज्यों से जिंदा भेड़ खरीदकर अपनी डिमांड को पूरा कर रहे हैं. कुछ ऐसा ही हाल बकरे-बकरियों का भी है. बकरीद के दौरान साल का एक महीना तो ऐसा है कि लाइन लगाकर बकरे बिकते हैं. बकरी पालकों को भी सबसे ज्यादा मुंह मांगे दाम बकरीद के बाजार में ही मिलते हैं. अगर आप भी बाजार को देखते हुए भेड़-बकरी पालन के बारे में सोच रहे हैं तो आज ही शुरू कर दें. सरकार भी आपके इस काम में आपकी मदद करेगी. 100 से लेकर 500 भेड़-बकरी पालने तक पर सरकार मदद दे रही है.
दोनों को मिलाकर पालिए या अलग-अलग, लेकिन मदद दोनों पर ही मिलेगी. नेशनल लाइव स्टॉक मिशन (NLM) योजना के तहत पशुपालन के लिए 50 फीसद की सब्सिडी दी जा रही है. योजना के तहत बकरी पालन के लिए केन्द्र सरकार की ओर से 50 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है. लेकिन इसके लिए बकरी पालन की ट्रेनिंग लेना जरूरी होता है. ये ट्रेनिंग सरकारी और प्राइवेट दोनों ही संस्थानों से ली जा सकती है. वैसे केन्द्र सरकार का सेंट्रल गोट रिसर्च इंस्टीट्यूट, मथुरा भी ट्रेनिंग देता है.
एनएलएम के बारे में एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति शहर या गांव में बकरी पालन करना चाहता है तो सरकार उसकी मदद करेगी. जैसे कोई 100 बकरी और पांच बकरों के साथ बकरी पालन करना चाहते हैं तो सरकार उसकी कुल लागत 20 लाख रुपये का 50 फीसद हिस्सा 10 लाख रुपये सब्सिडी के तौर पर देगी. इसी तरह अगर आप 200 बकरी और 10 बकरों के साथ बकरी पालन करना चाहते हैं तो सरकार की तरफ से आपको 20 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी.
अगर आपका प्लान 200 से ज्यादा बकरी पालन का है तो 300 बकरी और 15 बकरों के लिए सरकार से 30 लाख रुपये मिलेंगे. 400 बकरी और 20 बकरों के लिए 40 लाख और 500 बकरी, 25 बकरों के लिए केन्द्र सरकार 50 लाख रुपये की सब्सिडी एनएलएम के तहत दे रही है.
केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा में भेड़-बकरी पालन की ट्रेनिंग दी जाती है. यहां बरबरी, जमनापरी, जखराना नस्ल के बकरे-बकरी और मुजफ्फरनगरी नस्ल की भेड़ हैं. भेड़-बकरी के ब्रीड पर भी यहां काम होता है. सीआईआरजी में भेड़-बकरी पालन की साइंटीफिक ट्रेनिंग दी जाती है. यहां पीएचडी (रिसर्च स्कॉलर) और पीजी के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई भी कराई जाती है.
इसके लिए कई यूनिवर्सिटी ने सीआईआरजी के साथ समझौता किया हुआ है. इसमे मथुरा की यूनिवर्सिटी भी शामिल है. विदेशों से डिमांड आने पर उन्हें अच्छी नस्ल के बकरे और बकरी भी उपलब्ध कराए जाते हैं. ट्रेनिंग करने वालों को भी डिमांड के हिसाब से बकरे-बकरी दिए जाते हैं. वहीं विभिन्न कार्यक्रम के तहत पशुपालकों की समय-समय पर मदद भी की जाती है.
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