पशुओं को खिलाएं ये हरा चारादेश में दूध उत्पादन 24 करोड़ टन के आंकड़े को छू चुका है. उत्पादन से जुड़े पशुओं की संख्या देश में 300 करोड़ है. लेकिन परेशान करने वाली बात ये है कि जितनी पशुओं की संख्या है उतना देश में दूध उत्पादन नहीं है. हमारे देश में प्रति पशु दूध उत्पादन बहुत कम है. शायद यही वजह है कि डेयरी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट के मामले में हमारी पोजिशन अच्छी नहीं है. हालांकि इसके कई कारण बताए जाते हैं. लेकिन एनिमल और डेयरी एक्सपर्ट के मुताबिक इसकी एक बड़ी वजह चारा भी है. क्योंकि जब तक पशुओं को बैलेंस डाइट नहीं मिलेगी तो उन्हें पोषण नहीं मिलेगा.
और एक अच्छी बैलेंस डाइट हमेशा हरे और सूखे चारे से तैयार होती है. एक्सपर्ट का कहना है कि देश में हरे और सूखे चारे की नहीं मिनरल्स की कमी भी 25 फीसद से ऊपर निकल गई है. यही वजह है कि दूध और उससे बने प्रोडक्ट महंगे होते जा रहे हैं. महंगे प्रोडक्ट की वजह से देश के डेयरी प्रोडक्ट, एक्सपर्ट मार्केट में अपनी जगह नहीं बना पा रहे हैं.
फिरोज अहमद, डॉयरेक्टर, कॉर्नेक्स्ट एग्री प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का कहना है कि सबसे पहले तो हमे डेयरी की लागत कम करने पर जोर देना चाहिए. डेयरी में पशुओं के पोषण को वरीयता दी जानी चाहिए. उत्पादकता बढ़ाने पर काम होना चाहिए. चारे की कमी या फिर इमरजेंसी के हालात में लगातार चारे की सप्लाई बनी रहे इसके लिए क्षेत्रीय चारा बैंक और स्टोरेज गोदाम स्थापित करने चाहिए. क्वालिटी के चारे और बीजों की सप्लाई में सुधार के लिए राज्यवार योजनाएं बननी चाहिए. इंपोर्ट को कम करते हुए बरसीम जैसे फलीदार बीजों की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दें. नॉन फारेस्ट बंजर जमीन, चरागाह भूमि और सामुदायिक भूमि का इस्तेमाल हरे चारे की खेती के लिए करना चाहिए.
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