गरीबों की गाय है बकरीबकरी को गरीबों की गाय इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसे आसानी से पाला जा सकता है. यह आकार में छोटी होती है और इसके खाने पर ज्यादा खर्च भी नहीं आता. वहीं बकरियों की कुछ नस्ल ऐसे भी होती है जो अधिक मात्रा में दूध देती है. इसलिए एक गरीब व्यक्ति भी आसानी से बकरी पाल सकता है. यही कारण है कि बकरी को गरीबों की गाय कहा जाता है.
बकरी का आकार छोटा होता है, यह गाय या भैंस से कम जगह घेरती है. बकरी के खाने और चारे के लिए कोई खास इंतजाम नहीं करना पड़ता, यह खाने-पीने में कोई नखरे नहीं दिखाती. यह हर तरह के पौधे और यहां तक कि पत्ते भी खा जाती है, जबकि गाय और भैंस खाने में नखरे दिखाती हैं, इनके लिए खास चारा तैयार करना पड़ता है.
बकरी हर तरह के वातावरण में पलती है, चाहे वह ठंडा इलाका हो या गर्म जलवायु वाला इलाका. चाहे रेगिस्तान हो या पहाड़, बकरी हर तरह के इलाकों में खुद को आसानी से ढाल लेती है. बकरी की कीमत गाय या भैंस से बहुत कम होती है, इसलिए कोई भी गरीब व्यक्ति आसानी से बकरी खरीद सकता है.
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बकरी पालने में ज्यादा खर्च नहीं आता, इसलिए गरीब लोग भी यह खर्च उठा सकते हैं. जो लोग महंगे दामों के कारण बकरी, गाय या भैंस नहीं खरीद पाते, वे बकरी खरीदकर अपनी दूध की ज़रूरत पूरी कर सकते हैं. बकरी के दूध में कई औषधीय गुण होते हैं और यह आसानी से पच जाता है. दूध के अलावा बकरी के और भी कई उपयोग हैं. इसका मांस भी बड़ी मात्रा में खाया जाता है और सभी समुदायों के लोग इसे खाते हैं. इसके मांस में वसा कम होती है.
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बकरी की जमुनापारी नस्ल नस्ल उत्तर प्रदेश के इटावा जिले और यमुना, गंगा और चंबल क्षेत्रों के पहाड़ी इलाकों में पाई जाती है. इस प्रजाति की कुछ बकरियों के शरीर पर गहरे या काले रंग के धब्बे भी पाए जाते हैं. इसके कान लंबे और मुड़े हुए सपाट और लटके हुए होते हैं. इसके वयस्क बकरे का औसत शरीर का वजन 65 से 85 किलोग्राम होता है, जबकि बकरे का वजन 45 से 61 किलोग्राम होता है.इस बकरी की दूध उत्पादन क्षमता औसतन 1.5 से 2.0 किलोग्राम प्रतिदिन है. इसका औसत दूध उत्पादन 200 किलोग्राम प्रति ब्यांत है.
इस नस्ल की बकरी मुख्य रूप से पंजाब, राजस्थान, आगरा और यूपी के जिलों में पाई जाती है. इस नस्ल के बकरे की ऊंचाई मध्यम होती है. इसका शरीर घना होता है. इसके कान छोटे और चपटे होते हैं. इस नस्ल के नर बकरे का वजन 38-40 किलोग्राम और मादा बकरी का वजन 23-25 किलोग्राम होता है. इस नस्ल की बकरी प्रतिदिन 1.5-2.0 किलोग्राम दूध और प्रति ब्यांत 140 किलोग्राम दूध देती है.
बीटल नस्ल की बकरी ज्यादातर पंजाब और हरियाणा राज्यों में पाई जाती है. बीटल बकरी को मुख्य रूप से मांस और डेयरी के लिए पाला जाता है. इसके नर बकरे का वजन 50-60 किलोग्राम होता है. जबकि मादा बकरी का वजन 35-40 किलोग्राम होता है. नर बकरी की शरीर की लंबाई लगभग 86 सेमी और मादा बकरी की शरीर की लंबाई लगभग 71 सेमी होती है. इस नस्ल की मादा बकरी प्रतिदिन औसतन 2.0-2.25 किलोग्राम दूध देती है और प्रति ब्यांत 150-190 किलोग्राम तक दूध देती है.
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