Animal Care in Flood: बाढ़ के दौरान पशु जोखि‍म और बीमारी से बचे रहें तो अपनाएं एक्सपर्ट टिप्स

Animal Care in Flood: बाढ़ के दौरान पशु जोखि‍म और बीमारी से बचे रहें तो अपनाएं एक्सपर्ट टिप्स

Animal Care in Flood मॉनसून में बाढ़ से हालात खराब होते ही आम जनजीवन के साथ-साथ पशुपालन भी प्रभावित होता है. इंसान और पशुओं दोनों की जान पर बन आती है. पशु बीमारियों से तो मरते ही हैं, साथ ही कई बार पानी के साथ बह भी जाते हैं. पशुओं को इसी से बचाने के लिए एडवाइजरी जारी की जाती है. 

Advertisement
Animal Care in Flood: बाढ़ के दौरान पशु जोखि‍म और बीमारी से बचे रहें तो अपनाएं एक्सपर्ट टिप्सप्रतीकात्मक फोटो.

मॉनसून सक्रिंय हो चुका है. कई जगह से पहाड़ दरकने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. हालांकि अभी लगातार कई-कई दिन तक बारिश नहीं हुई है. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि होगी नहीं. जैसे ही इस तरह की बारिश होगी तो बाढ़ जैसे हालात भी बनेंगे. खासतौर से पहाड़ों पर होने वाली बारिश का पानी बहकर सीधे मैदानी इलाकों में ही आता है. नदियां ऊफनने लगती हैं. नदी किनारे के गांवों में भी पानी भरने लगता है. एक साल पहले पंजाब में इसी तरह के हालात देखे गए थे. 

ये वो वक्त और हालात होते हैं जब इंसान और पशु दोनों पर ही बीमारियां एक साथ अटैक करती हैं. इसी के चलते देश की वेटरनरी और एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी और एनिमल रिसर्च सेंटर बाढ़ के संबंध में पशुओं को लेकर एडवाजरी जारी करती हैं. ऐसी ही एक एडवाइजरी लाला लाजपत राय वेटरनरी और एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी (लुवास), हिसार की भी है. उसी को यहां शेयर किया जा रहा है. 

गाय-भैंस को ऐसे बचाएं बाढ़ से  

  • मौसम और बाढ़ के संबंध में जारी होने वाले अलर्ट को लेकर जागरूक रहें.
  • एनिमल शेड में पानी की निकासी की योजना पर काम करना शुरु कर दें. 
  • एनिमल शेड में पानी भरने की आशंका हो तो पशुओं के के लिए ऊंची जगह का इंतजाम कर लें. 
  • बाढ़ आने की स्थि ति में पशुओं के लिए हरे चारे, भूसा और दाने का इंतजाम कर लें. 
  • बाढ़ के दौरान पशुओं के लिए पीने के पानी का इंतजाम भी पहले से ही कर लें. 
  • पशुओं को संक्रमण से बचाने, बीमारियों का पता लगाने के लिए रोजाना जांच कराएं. 
  • बरसात के दौरान होने वाली गलघोटू, खुरपका-मुंहपका आदि की वैक्सीन लगवा दें. 
  • बाढ़ के हालात में पशुओं के कान में टैग होना जरूरी है. इससे राहत कार्य आसान हो जाता है. 
  • बाढ़ के दौरान पशु मैनेजमेंट के लिए इमरजेंसी किट पहले से तैयार करके रख लें. 
  • किट में हॉल्टर, रस्सी, दवाएं, सफाई उपकरण, फोन, टार्च, पोर्टेबल रेडियो और बैट्रियां रख लें. 
  • बाढ़ का अलर्ट आने पर पशुओं को बाढ़े में खुला रखें बांधे नहीं. जिससे पानी आने पर वो भग सकें. 
  • पशु बाड़े के आसपास बिजली के तार हों तो उन्हें सही करा लें.
  • जो चीजें जल्द आग पकड़ सकती हैं उन्हें पशुओं के बाड़े से दूर ही रखें. 
  • जलभराव-बाढ़ के दौरान पशुओं की निगरानी रखें. 
  • नदी में बढ़ रहे पानी के स्तर की जानकारी लेते रहें. 
  • बाढ़ के दौरान मरे पशुओं को दफनाने के लिए छह फीट गहरा गड्डा खोदें.
  • मृत पशुओं को नदी-कुएं से कम से कम 100 फुट दूरी पर दफनाएं.  

बाढ़ से पहले किए जाने वाले जरूरी काम 

  • बाहरी परजीवी कंट्रोल करने को एक्सपर्ट की सलाह पर कीटनाशक का इस्तेमाल का इस्तेमाल करें. 
  • डेयेरी फार्म पर प्राकृतिक विधि से परजीवी नियंत्रण जैसे की देसी मुर्गीपालन करें.
  • पशुओं को गीला चारा, काली-फफूंद लगी तूड़ी (भूसा) न दें.
  • चारे की 24 घंटे उपलब्धता के लिए फीड ब्लॉक का इस्तेमाल करें.
  • शेड और छतो पर जलभराव या पानी ना टपकने दें. निकासी बनाएं. 
  • बारिश के दौरान पशुओं के बाड़े में बाहरी परजीवी (चिचड़, मख्खी) न फैलने दें. 
  • बारिश के बाद होने वाले रोग बबेसिया, सर्रा, थेलेरिया से बचाने के उपाय कर लें. 
  • पशुओं के बाड़े में साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें और हवा का आवागमन (वेंटिलेशन) सही रखें. 

ये भी पढ़ें: 

Milk Production: गाय-भैंस के बच्चा देने के बाद इन 5 कारणों से कम हो सकता है दूध उत्पादन

EL-Nino: डेयरी-पशुपालन पर बढ़ा अल नीनो का खतरा, कम हो सकता है दूध उत्पादन!

POST A COMMENT