
देश में करीब 14 हजार करोड़ अंडों का उत्पादन होता है. लेकिन देश में अंडों का जितना उत्पादन है उसका 25 फीसद भी एक्सपोर्ट नहीं होता है. और जो थोड़ा बहुत अंडा एक्सपोर्ट भी होता है तो उसके सबसे ज्यादा खरीदार खाड़ी देश हैं. और अफसोस की बात ये है कि रूस-उक्रेन वॉर के दौरान बहुत सारे नए अंडा खरीदार देश भारत आए थे, अंडा खरीदकर भी ले गए, लेकिन दोबारा बाजार में लौटकर नहीं आए. बीते साल अमेरिका ही एक करोड़ अंडे खरीदकर ले गया था. लेकिन दोबारा अमेरिका की ओर से कोई डिमांड नहीं आई है.
श्रीलंका, मलेशिया और मालदीव भी भारत से अंडा खरीद चुके हैं, लेकिन भारत इन्हें स्थायी ग्राहक नहीं बना सका. जबकि भारत का अंडा विश्व में सबसे सस्ता है. दुनिया के कई देश भारतीय पोल्ट्री के अंडों को पसंद करते हैं. इसी को देखते हुए पोल्ट्री एक्सपर्ट ने अंडा एक्सपोर्ट बढ़ाने के बारे में कुछ सुझाव दिए हैं. ये सुझाव जहां सरकार के लिए हैं तो पोल्ट्री फार्मर को भी इसमे सहयोग करना होगा.
इंटरनेशनल ऐग कमीशन (आईईसी) के प्रेसिडेंट और श्रीनिवास हैचरी ग्रुप के एमडी सुरेश आर चित्तूरी ने किसान तक से बात करते हुए कहा, ये अच्छी बात है कि दुनिया भारतीय पोल्ट्री की तरफ देख रही है. कई छोटे-बड़े देश भारत से अंडा खरीद चुके हैं. लेकिन, जैसा की मैं हमेशा बोलता हूं कि अभी अंडे की क्वालिटी और सुधरने की जरूरत है. सिर्फ सस्ता होने से काम नहीं चलेगा.
साफ-सफाई और अंडे के वजन पर भी ध्यान देना होगा. और एक खास बात ये कि अंडों को बीमारी मुक्त करना होगा. इसके साथ ही हमे भारत सरकार की मदद भी चाहिए होगी. जरूरत इस बात की भी है कि जिन देशों में संभावना है वहां हमे भारतीय अंडों का प्रचार करना होगा. और ये सब बिना सरकार की मदद के संभव नहीं होगा. आज हर देश अपने प्रोडक्ट का दूसरे देशों में प्रचार करता है.
फिर इस मामले में हम क्यों पीछे रहें. जो देश हमसे अंडे खरीद रहे हैं या खरीदकर ले जा चुके हैं उन्हें भी मार्केटिंग के लिए आधार बनाया जा सकता है. और सिर्फ अंडे का ही नहीं, सभी पोल्ट्री प्रोडक्ट का प्रचार करने की भी जरूरत है. इसके लिए पोल्ट्री सेक्टर भी सरकार के साथ आने को तैयार है.
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