यूपी में 6 जिलों की महिलाएं रोज कर रहीं पौने चार लाख लीटर दूध का कारोबारगर्मियों के दौरान अक्सर पशुओं को पानी की कमी हो जाती है. और पानी की कमी होने पर पशुओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. हीट स्ट्रैस और डिहाइड्रेशन जैसी बड़ी परेशानियां तो गाय-भैंस के लिए जानलेवा साबित हो जाती हैं. हीट स्ट्रैस के चलते ही पानी की कमी हो जाती है. और जैसे ही पशुओं में पानी की कमी होने लगती है तो डिहाइड्रेशन की परेशानी खड़ी हो जाती है. एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक गर्मियों में गाय-भैंस को कितना पानी पीने के लिए देना चाहिए इसके मानक तय किए गए हैं, लेकिन, फिर भी कई बार जाने-अनजाने में लापरवाही हो ही जाती है.
इसी से बचने के लिए हरा चारा खिलाकर भी पशुओं में पानी की कमी को पूरा किया जा सकता है. बावजूद इसके गर्मियों के दौरान पशुपालन में पानी की बहुत जरूरत होती है. पशुओं को पानी पिलाने से लेकर उन्हें दिन में कई बार नहलाने तक के लिए पानी की जरूरत होती है. लेकिन जब पानी की कमी होती है तो उसका सबसे पहले असर पीने के पानी की जरूरत पर पड़ता है.
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि दूध देने वाली गाय और भैंस के लिए पानी की बहुत जरूरत होती है. पानी की कमी का असर दूध उत्पादन पर भी पड़ता है. गाय अगर दूध दे रही है तो दिनभर में उसे 30 से 50 लीटर पानी पीने के लिए चाहिए. दूसरी ओर अगर भैंस दूध दे रही है तो उसे दिनभर में 40 से 70 लीटर तक पानी की जरूरत होती है. गर्मियों में जमीन से निकला सामान्य पानी ही पिलाना चाहिए. नल की सप्लाई वाला पानी है तो वो गर्म नहीं होना चाहिए. अगर मुमकिन हो तो एक साफ हौज या बर्तन में सामान्य तापमान वाला पानी पशु के सामने ही रख देना चाहिए, जिससे जब भी उसे प्यास लगे तो वो जरूरत के हिसाब से पी ले.
चारा और भोजन पाचने में मददगार होता है.
शरीर के अलग-अलग जरूरतमंद हिस्सों की पूर्ति हो जाती है.
मूत्र के माध्यम से अवांछनीय और विषैले तत्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं.
गर्मियों के दौरान पानी शरीर का तापमान बनाए रखने में मदद करता है.
दूध में करीब 85 फीसद पानी होता है, इसलिए एक लीटर दूध पर ढाई लीटर पानी चाहिए.
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