The fisheries and seafood sector has been diversifying its markets toward Southeast Asia since the Trump administration imposed steep tariffs on the industry. (Image: Unsplash)Sea Food Export फिशरीज सेक्टर के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है. भारत का सीफूड एक्सपोर्ट बढ़ गया है. न सिर्फ कीमत के मामले में बल्कि मात्रा भी टनों के हिसाब से बढ़ी है. और ये सब तब हुआ है जब अमेरिका ने भारतीय झींगा पर 58.26 फीसद टैरिफ लगाया हुआ है. गौरतलब रहे भारतीय सीफूड एक्सपोर्ट में सबसे बड़ा आंकड़ा झींगा का होता है. हालांकि टैरिफ बढ़ने के साथ ही झींगा की डिमांड और रेट दोनों पर असर पड़ा था. लेकिन टैरिफ बढ़ने के बाद आई वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही की रिपोर्ट में सीफूड एक्सपोर्ट के आंकड़े ने उछाल मारी है.
अमेरिका और चीन झींगा के बड़े खरीदार हैं. इसमे से अमेरिका को झींगा का एक्सपोर्ट जीरो हो गया था. लेकिन अब दूसरे देशों के आने से सीफूड एक्सपोर्ट का आंकड़ा बढ़ रहा है. वहीं फिशरीज एक्सपर्ट का कहना है कि कई और ऐसे देश से झींगा की डिमांड आ रही है जो प्रोटीन की तलाश में बाजार को देख रहे हैं. जिसके चलते झींगा की डिमांड बढ़ रही है.
मत्स्य पालन विभाग ने द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत करने, सीफूड व्यापार को बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और वैल्यू-एडेड एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक समकक्षों, विदेशी मिशन और उद्योग हितधारकों के साथ मंत्री और सचिव-स्तर की चर्चाएं की हैं. जिसमें निवेशकों की बैठकें और उच्च-स्तरीय जुड़ाव जैसी पहल शामिल हैं. केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और पीयूष गोयल ने भारतीय एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए एक स्टेक होल्डर कंसल्टेशन की अध्यक्षता की, जिसमें सीफूड एक्सपोर्ट, मार्केट एक्सेस, वैल्यू चेन को मजबूत करने, गहरे समुद्र में माइनिंग के अवसरों और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें मत्स्य पालन क्षेत्र पर खास जोर दिया गया.
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