कोई भी गोवंश सड़क पर बेसहारा न घूमे और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सकेअल नीनो का असर कब से दिखाई देगा. अल नीनो से कौन और क्या-क्या प्रभावित होगा. हालांकि ये सब आने वाले वक्त की बातें हैं, लेकिन अल नीनो का डर अभी से दिखाई देने लगा है. किसान हो या पशुपालक हर कोई अल नीनो से जुड़े तमाम सवाल पूछ रहे हैं. खासतौर पर पशुपालक अपने पशुओं को लेकर बहुत परेशान दिखाई दे रहे हैं. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो बदलते मौसम का पशुओं पर गहरा असर पड़ता है. पशु तनाव में आ जाते हैं. पशुओं का उत्पादन घट जाता है और ग्रोथ धीमी पड़ जाती है. अल नीनो के चलते बारिश कम होने और गर्मी ज्यादा पड़ने की बात कही जा रही है. वहीं कम बारिश और तेज गर्मी के चलते पशु तनाव में आ जाता है.
पशु के तनाव में आते ही उसकी खुराक पर सबसे पहले असर पड़ता है. पशु खाना-पीना कम कर देता है. खुराक कम होते ही दूध उत्पादन घट जाता है. जिसके चलते डेयरी बाजार पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है. खासतौर से उत्तर भारत के डेयरी सेक्टर पर खासा असर देखने को मिल सकता है. इससे निपटने के लिए एनिमल एक्सपर्ट ने पशुओं के लिए एक तय मात्रा में खुराक खिलाने की बात कही है.
नेपियर घास, बरसीम, ज्वार, मक्का और लुसैन.
वजन- 15 से 25 किलो रोजाना.
फायदे- पाचन सही होगा और दूध की मात्रा बढ़ेगी.
भूसा, सूखी घास और पराली.
वजन- 5 से 6 किलो रोजाना.
फायदे- पेट सही रहता है और जुगाली कराने में आसानी रहती है.
दिनभर में तीन से पांच बार साफ और स्वच्छ पानी पिलाएं. एक वयस्क गाय-भैंस को दिनभर में जरूरत के हिसाब से 50 से 100 लीटर तक पानी पिलाएं.
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