
अंडे को प्रोटीन का एक अच्छा सोर्स माना जाता है. कहा जाता है कि कीमत में अंडा सस्ता है और प्रोटीन ज्यादा मिलता है. जबकि अंडे के बराबर प्रोटीन देने के मामले में डेयरी प्रोडक्ट और दालें महंगी पड़ती हैं. लेकिन इसी पोल्ट्री ऐग को लेकर एक बड़ी चेतावनी आ रही है. ये चेतावनी क्रेडिट रेटिंग इन्फॉर्मेशन सर्विसेज ऑफ इंडिया लिमिटेड (CRISIL) ने दी है. ये संस्था कंपनियों की साख के बारे में जानकारी देने के साथ ही मार्केट एनालिटिक्स भी देती है. संस्था का कहना है कि कुछ ऐसे कारण हैं जिसके चलते साल 2025-26 में पोल्ट्री ऐग में मुनाफा आधा रह जाएगा.
पोल्ट्री सेक्टर के लिए ये एक बड़े झटके वाली खबर है. पोल्ट्री सेक्टर पहले ही कई तरह के जोखिम से जूझ रहा है. पोल्ट्री एक्सपर्ट ने आशंका जताई है कि अगर ऐसा होता है तो इसके दोहरे नुकसान होंगे. गरीबों का प्रोटीन महंगा हो जाएगा और गरीबों के हाथ से रोजगार चला जाएगा. ये सब तब हो रहा है जब विश्व का सबसे सस्ता पोल्ट्री ऐग भारत में बिक रहा है और विश्व का सबसे महंगा पोल्ट्री फीड भारत के पोल्ट्री फार्मर अपनी मुर्गियों को खिला रहे हैं.
इंटरनेशनल ऐग कमीशन के चेयरमैन और श्रीनिवास ग्रुप के एमडी सुरेश चित्तुरी ने किसान तक को बताया कि CRISIL की रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 में अंडे का मुनाफा आधा यानि 50 फीसद ही रह जाएगा. जबकि पहले से पोल्ट्री फार्मर कम मुनाफे पर अंडा बेच रहे हैं. क्योंकि 1980 के बाद से प्रोटीन वाली चीजें जैसे दूध और दाल के दाम तो खूब बढ़े, लेकिन दाम के मामले में अंडा पीछे ही रह गया.
दूध 70 रुपये लीटर तक बिक रहा है. दालें 150 से 200 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं. मीट के दाम भी बढ़ गए हैं. जबकि दिसम्बर-जनवरी में ये पहला मौका है जब अंडा रिटेल में 8 रुपये का बिक रहा है. लेकिन ये भी कब तक, ज्यादा से ज्यादा फरवरी तक. और उसके बाद अंडे की वहीं हालत हो जाएगी कि फार्मर के लिए अंडे की लागत तक निकालना मुश्किल हो जाएगा.
सुरेश चित्तुरी ने बताया कि आज जब 8 रुपये का अंडा है तो सबसे ज्यादा और सस्ता प्रोटीन देने में अंडा ही आगे है. गरीब आज भी प्रोटीन के मामले में अंडा खरीदकर खा लेता है. वहीं पोल्ट्री में छोटे पोल्ट्री फार्मर पहले ही फार्म पर मुर्गियों के झुंड में संख्या कम कर रहे हैं. कुछ ऐसे भी हैं जो पोल्ट्री फार्म को बंद कर रहे हैं. ऐसा होने से ये जोखिम बढ़ गया है कि पोल्ट्री ऐग का काम कुछ बड़े खिलाड़ियों के हाथों में सिमटकर न रह जाए. अगर ऐसा होता है तो गरीबों का प्रोटीन यानि अंडा महंगा हो जाएगा और ग्रामीण रोजगार का मौका भी हाथ से निकल जाएगा.
सुरेश चित्तुरी का कहना है कि जब तक पोल्ट्री फीड के मामले में कोई सुधार नहीं किया जाएगा तब तक हालात नहीं सुधरेंगे. फीड में शामिल मक्का की हालत किसी से छिपी नहीं है. महंगी मक्का मिलने से फीड की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इथेनॉल में मक्का की डिमांड ने हालात और बिगाड़ दिए हैं. 2024 से मक्के की कीमत 14 फीसद तक बढ़ गई हैं. भारत में अभी भी फीड के लिए जीएम मक्का और जीएम सोया पर बैन लगा हुआ है. अमेरिका और ब्राजील 90 फीसद जीएम क्षेत्र में खेती करते हैं, जिससे 20 से 30 फीसद ज्यादा पैदावार होती है जो लागत को कम कर देती है.
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