आंध्र प्रदेश के एक मछुआरे को सोन मछली मिली है. दरअसल सोन मछली इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि उसकी कीमत मछली की नहीं बल्कि सोने वाली है. इस मछली का नाम कचिरी है जिसकी बाजार में कीमत 3.80 लाख रुपये मिली है. इस एक मछली ने ही मछुआरे को लखपति बना दिया है. कोनासीमा जिले के बालुसु टिप्पा के रहने वाले मछुआरे को कचिरी मछली मिली जिसका वजन 30 किलो है. यह मादा कचिरी है जिसे समुद्र से पकड़ा गया है. यह मछुआरा कचिरी मछली लेकर काकीनाडा कुंभाभिषेकम डॉक पर पहुंचा और वहां नीलामी हुई. सोमवार को हुई नीलामी में मछुआरे को एक मछली के लिए 3.80 लाख रुपये मिले.
कचिरी को मछुआरे गोल्डन फिश या सोन मछली बोलते हैं क्योंकि एक ही मछली उन्हें लखपति बना देती है. मछली का कारोबार करने वाले व्यापारी भी इसे कमाई का बेहतर जरिया मानते हैं. कई मछलियों को खरीदने से अच्छा एक ही मछली उनकी भरपूर कमाई करा देती है. इस मछली को गहरे समुद्र में पकड़ा जाता है, इसलिए सभी मछुआरों के लिए यह काम आसान नहीं होता. कुछ एक्सपर्ट मछुआरे ही यह काम कर पाते हैं. कचिरी मछली का कुछ हिस्सा हेल्थकेयर के क्षेत्र में इस्तेमाल होता है. यहां तक कि महंगी शराबों में भी इसे डाला जाता है.
ये भी पढ़ें: Fish Farming: मछली-झींगा कारोबार को संशोधित बिल से मिलेगी नई रफ्तार, पूरी हुई कारोबारियों की बड़ी मांग
मछुआरों से जो व्यापारी इस मछली को खरीदते हैं, वे आगे ऊंची कीमतों पर बेचकर बंपर कमाई करते हैं. इस मछली की री-सेल वैल्यू बहुत अधिक होती है, इसलिए व्यापारी हर हाल में कचिरी मछली से मुनाफा कमाते हैं. इस मछली का निर्यात भी महंगे दामों में होता है. मत्स्यपालन विभाग और एक्सपर्ट की मानें तो कचिरी को गोल्डन फिश इसलिए बोलते हैं क्योंकि इसकी कीमत सोने जैसी मिलती है.
कचिरी मछली के कुछ हिस्सों, पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) और उसके फेफड़ों के कुछ हिस्सों का उपयोग सर्जरी के दौरान डॉक्टरों और डॉक्टरों द्वारा उपयोग किए जाने वाले धागे के निर्माण के लिए भी किया जाता है. अभी हाल ही में मछुआरों ने सुनहरी मछली के जाल और बिक्री का जश्न मनाया था. मछुआरे बताते हैं, "यह मछली एक जगह से दूसरी जगह भागती रहती है और इसे पकड़ना इतना आसान नहीं है."
ये भी पढ़ें: Good News: दुनिया का ये अरबपति अब पालेगा मछली, खेती-बाड़ी में भी आजमाएगा हाथ
कचिरी मछली का वैज्ञानिक नाम प्रोटोनिबिया डायकैंथस है. यह मछली ब्लैकस्पॉटेड क्रोक के नाम से मशहूर है. यह मछली इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उपलब्ध है और थाइलैंड, सिंगापुर और जापान में इसका बाजार मूल्य बहुत अधिक है. इस मछली का वजन आम तौर पर 10 से 40 किलोग्राम के बीच होता है और इसके एयर ब्लैडर और मांस का उपयोग दवा कंपनियों द्वारा दवाएं तैयार करने में किया जाता है. स्थानीय मछुआरों ने कहा कि घुलनशील टांके इसके एयर ब्लैडर से बनाए जाते हैं.
Copyright©2025 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today