मुस्लिम परिवार छोड़ रहे हैं गोपालन, गो तस्करी की बदनामी ने रोजी-रोटी का जरिया छीना

मुस्लिम परिवार छोड़ रहे हैं गोपालन, गो तस्करी की बदनामी ने रोजी-रोटी का जरिया छीना

अलवर के तिजारा, किशनगढ़बास, रामगढ़, गोविंदगढ़ और नौगांव क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जो गाय का दूध बेचकर अपना जीवन यापन करते हैं. लेकिन कुछ चुनिंदा गोतस्करों के कारण मेव समाज के लोग परेशान हैं. लोगों ने कहा कि गलत करने वाले लोगों को सजा मिलनी चाहिए. लेकिन कुछ गलत लोगों के कारण और लोग भी परेशान होते हैं. अलवर के नंगलीवाल गांव में करीब 200 परिवार हैं. इसमें डेढ़ सौ के आसपास मुस्लिम परिवार हैं. सभी ज्यादातर गाय पालन करते हैं और गाय का दूध बेचकर अपने बच्चों का पेट भरते हैं.

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मुस्लिम परिवार छोड़ रहे हैं गोपालन, गो तस्करी की बदनामी ने रोजी-रोटी का जरिया छीनाअलवर में गोपालन

गो तस्करी के लिए अलवर पूरी दुनिया में बदनाम है. अलवर में सबसे पहले मॉब लिंचिंग का मामला सामने आया. तो अब तक छह मॉब लिंचिंग की घटनाएं हो चुकी हैं. इसके साथ होने वाली गाय की घटनाओं के चलते अब मुस्लिम परिवार गोपालन का काम छोड़ने लगे हैं. कुछ चुनिंदा गो तस्करों के चलते मुस्लिम समाज बदनाम हुआ है. इसका सीधा असर राजस्थान में रहने वाले मेवात के लोगों पर पड़ रहा है.

अलवर के दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां आज भी मुस्लिम परिवार गो पालन करते हैं. सालों से उनके दादा और पड़दादा गाय पालन करके अपना जीवन यापन करते हैं. लेकिन आए दिन होने वाली गो तस्करी और मॉब लिंचिंग की घटनाओं के चलते ग्रामीण गायों का पालन काम करने लगे हैं. राजस्थान हरियाणा सीमा स्थित अलवर के नौगांव क्षेत्र के नांगलीवाल गांव में रहने वाले मजीद खान ने बताया कि उनके दादा और उनके पुरखे सालों से गाय पालन का काम करते हैं. लेकिन अब गाय पालने में मुश्किल होती है. 

गोपालन छोड़ रहे किसान

पहले उनके पास 100 से ज्यादा गाय थी, लेकिन अब केवल 30 गायें बची हैं. गाय को जब भी वो कहीं लेकर जाते हैं या लाते हैं, तो उसके लिए उनको पूरे कागजात बनवाने पड़ते हैं. आए दिन उन पर आरोप लगते हैं. इसी गांव के ही रहने वाले इमरान खान ने बताया कि वो कुछ साल पहले तक गाय पालते थे. लेकिन अब उन्होंने गाय रखना बंद कर दिया है क्योंकि इस दौरान उनको कई तरह की दिक्कतें होती हैं.

अलवर के तिजारा, किशनगढ़बास, रामगढ़, गोविंदगढ़ और नौगांव क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जो गाय का दूध बेचकर अपना जीवन यापन करते हैं. लेकिन कुछ चुनिंदा गोतस्करों के कारण मेव समाज के लोग परेशान हैं. लोगों ने कहा कि गलत करने वाले लोगों को सजा मिलनी चाहिए. लेकिन कुछ गलत लोगों के कारण और लोग भी परेशान होते हैं. अलवर के नंगलीवाल गांव में करीब 200 परिवार हैं. इसमें डेढ़ सौ के आसपास मुस्लिम परिवार हैं. सभी ज्यादातर गाय पालन करते हैं और गाय का दूध बेचकर अपने बच्चों का पेट भरते हैं.

अलवर में खुलेआम गो तस्करी

अलवर क्षेत्र तस्करी के लिए पूरे देश दुनिया में बदनाम है. तस्कर खुलेआम यहां से गायों की तस्करी करते हैं. हरियाणा लेकर जाते हैं. अलवर जिले में हर महीने गो तस्करी के 50 से ज्यादा मामले सामने आते हैं, लेकिन पुलिस के सभी प्रयासों के बाद भी खुलेआम तस्करी जारी है.

अब तक 6 मॉब लिंचिंग की घटनाएं

3 अप्रैल 2017 को अलवर के बहरोड़ में मेवात जिले के नूंह के जयसिंहपुर निवासी पहलू खां (50) को पीट पीट कर मौत के घाट उतार दिया गया था. 9 नवंबर 2017 को रात गोविंदगढ़ थाना इलाके में उमर खान नाम के व्यक्ति की पिटाई के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. 23 दिसंबर 2017 को अलवर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र में एक बार फिर गोवंश ले जा रहे एक युवक की 40-50 लोगों ने पिटाई की थी. 20 जुलाई 2018 को अलवर के रामगढ़ इलाके में गो तस्करी के शक में भीड़ ने अकबर पर हमला बोल दिया था. बाद में अकबर की मौत हो गई थी. 

अगस्त 2019 में शाहजहांपुर थाना क्षेत्र में मॉब लिंचिंग की घटना सामने आई थी. शाहजहांपुर क्षेत्र के खुसा की ढाणी में देर रात भीड़ ने एक गोतस्कर की जमकर पिटाई कर दी थी. 15 सितंबर 2021 को 19 वर्षीय योगेश बाइक से अपने गांव भटपुरा जा रहा था. इस दौरान एक बालिका उसकी बाइक से टकरा गई थी. इस पर समाज विशेष के लोगों ने योगेश को पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था.(हिमांशु शर्मा की रिपोर्ट)

 

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