
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि इस सप्ताह सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों की एक सीरीज उत्तर-पश्चिमी भारत में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं लेकर आने वाली है. इससे प्रमुख कृषि राज्यों में चल रही रबी की फसल की कटाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. लगातार तीन पश्चिमी विक्षोभों के कारण पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में मौसम की स्थिति अस्थिर रहने की संभावना है. इन राज्यों में छिटपुट बारिश हो सकती है और हवा की गति 30–50 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है.
हालांकि बारिश से बढ़ते तापमान से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन इसका समय—जो कि कटाई के सबसे व्यस्त समय के साथ मेल खाता है—किसानों के बीच चिंता का कारण बन गया है.
इस बेमौसम बारिश से खड़ी रबी की फसलों—विशेष रूप से गेहूं, सरसों और दालों—पर बुरा असर पड़ने की आशंका है. ये फसलें इस समय पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पकने या कटाई के चरण में हैं. इस क्षेत्र की मुख्य फसल, गेहूं, इस चरण में नुकसान के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील होती है. तेज हवाओं के साथ होने वाली बारिश से फसलें जमीन पर गिर सकती हैं (जिसे 'लॉजिंग' कहते हैं), जिससे कटाई मुश्किल हो जाती है और पैदावार और अनाज, दोनों की क्वालिटी कम हो जाती है. बहुत अधिक नमी के कारण फंगल संक्रमण भी हो सकता है और अनाज के दाने भरने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है.
सरसों की फसलों में बीज झड़ने और तेल की मात्रा कम होने का खतरा रहता है, जबकि चना जैसी दालों को नमी से नुकसान पहुंच सकता है, जिससे पैदावार और बाजार मूल्य, दोनों पर असर पड़ सकता है.
कटाई से ठीक पहले के समय में होने वाली यह बेमौसम बारिश अनाज की क्वालिटी को प्रभावित कर सकती है. इससे संभव है कि फसल की क्वालिटी सरकारी खरीद के लिए निर्धारित 'उचित औसत गुणवत्ता' (FAQ) मानकों से नीचे चली जाए. इसका नतीजा यह हो सकता है कि मंडियों में फसल को खरीदने से मान कर दिया जाए, या किसानों को कम कीमतों पर अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़े.
मौसम का यह मौजूदा दौर एक पश्चिमी विक्षोभ के कारण है, जो इस समय जम्मू और उसके आसपास के क्षेत्रों में ऊपरी हवा के चक्रवाती सर्कुलेशन के रूप में मौजूद है. ऐसी ही दो और प्रणालियों के 26 मार्च से और फिर 28 मार्च की रात से उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित करने की उम्मीद है.
मध्य पाकिस्तान, उत्तर-पूर्वी राजस्थान और अन्य क्षेत्रों में मौजूद अतिरिक्त चक्रवाती सर्कुलेशन, साथ ही मन्नार की खाड़ी से लेकर पश्चिमी विदर्भ तक फैली एक 'ट्रफ' (निम्न दबाव की रेखा), इस सक्रिय मौसम पैटर्न को और बढ़ावा दे रही हैं.
23 मार्च को सुबह 08:30 बजे तक पिछले 24 घंटों में, असम में कुछ जगहों पर भारी बारिश (7–11 cm) दर्ज की गई. देश के कई हिस्सों में, जिनमें उत्तरी और मध्य क्षेत्र शामिल हैं, तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान भी देखे गए.
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे पकी हुई फसलों की कटाई तेजी से करें, जलभराव से बचने के लिए पानी की निकासी का उचित इंतजाम करें, और कटी हुई फसल को सूखी और ढकी हुई जगहों पर रखें. नुकसान को कम करने के लिए स्थानीय मौसम की जानकारी पर नजर रखना बहुत जरूरी होगा.
मार्च के अंत तक लगातार पश्चिमी विक्षोभों के आने की वजह से, उत्तर-पश्चिम भारत में रुक-रुककर बारिश और आंधी-तूफान जारी रहने की उम्मीद है. जहां एक तरफ इस मौसम से गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है, वहीं रबी की फसल को होने वाला नुकसान का खतरा अभी भी काफी ज्यादा है, जिससे यह समय इस पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए बहुत ही नाज़ुक बन गया है.(अनमोल नाथ बाली की रिपोर्ट)