
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2026 को लेकर अपना दूसरा लॉन्ग रेंज पूर्वानुमान जारी करते हुए बारिश, तापमान और अल नीनो की स्थिति पर ताजा अपडेट दिया है. विभाग के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में फिलहाल तटस्थ ENSO परिस्थितियां धीरे-धीरे अल नीनो की ओर बढ़ रही हैं और मॉनसून सीजन के दौरान अल नीनो विकसित होने की संभावना है. मौसम मॉडल यह भी संकेत दे रहे हैं कि जून के दौरान इसकी शुरुआती स्थिति बन सकती है, जबकि सितंबर तक इसके अधिक प्रभावी होने की संभावना बनी हुई है. वहीं, हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) फिलहाल तटस्थ स्थिति में है और मॉनसून के दौरान इसके तटस्थ बने रहने का अनुमान है.
मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि अगले एक हफ्ते तक मॉनसून के अरब सागर, अंडमान-निकोबार के समुद्री क्षेत्रों में आगे बढ़ने की संभावना है. विभाग जल्द मॉनसून की एंट्री की नई तारीख बताएगा. इससे पहले 4 दिन आगे/पीछे के अंतर से 26 मई को मॉनसून की एंट्री की तारीख दी थी.
IMD के अनुसार, जून से सितंबर 2026 के बीच पूरे देश में औसत मॉनसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का करीब 90 प्रतिशत रहने की संभावना है. यह संकेत देता है कि इस साल देश में मॉनसून सामान्य से कमजोर रह सकता है. विभाग ने बताया कि देशभर में कम बारिश की संभावना सबसे ज्यादा है और इसके लिए मॉडल लगभग 84 प्रतिशत संभावना दिखा रहे हैं. क्षेत्रवार पूर्वानुमान में पूर्वोत्तर भारत में सामान्य के करीब बारिश होने की संभावना जताई गई है.
इसके उलट उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य से कम बारिश का संकेत है. खास बात यह है कि मॉनसून कोर जोन (MCZ), जहां देश का बड़ा बारिश आधारित कृषि क्षेत्र स्थित है, वहां भी सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई है. यह इलाका खरीफ फसलों के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.
मौसम विभाग के अनुसार देश के अधिकांश हिस्सों में मॉनसून सीजन के दौरान सामान्य से कम वर्षा हो सकती है. हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों, पूर्वोत्तर भारत, दक्षिण प्रायद्वीप के पूर्वी हिस्सों और पूर्व-मध्य भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक या सामान्य वर्षा होने की संभावना बनी हुई है. इससे संकेत मिलता है कि बारिश का वितरण असमान रह सकता है और कुछ क्षेत्रों में अच्छी वर्षा के बावजूद व्यापक स्तर पर वर्षा घाटा देखने को मिल सकता है.
जून 2026 के लिए भी IMD का अनुमान बहुत उत्साहजनक नहीं है. विभाग ने कहा है कि जून महीने में देशभर में औसत बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है. अधिकांश राज्यों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत, दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों और मध्य भारत के चुनिंदा क्षेत्रों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हो सकती है.
तापमान के मोर्चे पर भी राहत के संकेत सीमित हैं. जून में देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान है. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में सामान्य से ज्यादा लू के दिनों की संभावना जताई गई है. महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में भी लू का असर बढ़ सकता है.
खेती-किसानी के नजरिये से यह पूर्वानुमान महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मॉनसून कोर जोन में कम बारिश की संभावना खरीफ फसलों की बुवाई, मिट्टी की नमी और सिंचाई प्रबंधन को प्रभावित कर सकती है. विशेष रूप से धान, सोयाबीन, दालों और अन्य बारिश आधारित फसलों वाले क्षेत्रों में किसानों को मौसम आधारित योजना बनानी पड़ सकती है.
मौसम विभाग ने जल संरक्षण, उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग, सूखा निगरानी व्यवस्था और समय पर मौसम चेतावनियों के उपयोग पर जोर दिया है, ताकि संभावित वर्षा घाटे के प्रभाव को कम किया जा सके. IMD ने कहा है कि जुलाई महीने की बारिश का अगला पूर्वानुमान जून 2026 के आखिरी हफ्ते में जारी किया जाएगा. तब तक अल नीनो की स्थिति और मॉनसून की प्रगति को लेकर और स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है.