El Nino से निपटने की तैयारी: केंद्र बनाएगा जिलावार इमरजेंसी प्लान, किसानों को घबराने की जरूरत नहीं

El Nino से निपटने की तैयारी: केंद्र बनाएगा जिलावार इमरजेंसी प्लान, किसानों को घबराने की जरूरत नहीं

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार अल नीनो के असर से निपटने के लिए जिला स्तर पर इमरजेंसी योजनाएं बना रही है. किसानों को चिंता करने के बजाय तैयारी करने की सलाह दी गई है, साथ ही वैकल्पिक फसलों और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है.

शिवराज सिंह चौहानशिवराज सिंह चौहान
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • May 29, 2026,
  • Updated May 29, 2026, 3:49 PM IST

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार अल नीनो के किसी भी बुरे असर से निपटने के लिए जिला-वार इमरजेंसी योजनाएं बनाएगी, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है, क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मॉनसून सीजन के लिए अभी अपना अंतिम पूर्वानुमान नहीं दिया है. कृषि मंत्री ने कहा कि चिंता करने के बजाय, तैयारी की जरूरत है.

"प्रभावित जिलों के लिए इमरजेंसी योजनाएं बनाई जाएंगी और जहां भी जरूरी होगा, फसलों में बदलाव पर विचार किया जाएगा," चौहान ने नई दिल्ली में दो-दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा.

अल नीनो और मॉनसून से जुड़ी चिंताएं

कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि मंत्रालय वैकल्पिक फसलों के लिए जिलों की पहचान कर रहा है और बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है. IMD ने 13 अप्रैल को अपनी पहले फेज के पूर्वानुमान में, इस साल के लिए दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के सामान्य से कम रहने का अनुमान लगाया है, जिसमें बारिश औसत का लगभग 92 प्रतिशत रहने की संभावना है.

विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने भी संकेत दिया है कि अल नीनो की स्थितियां मई-जुलाई तक वापस आ सकती हैं. इसके अलावा, अमेरिका की मौसम एजेंसी NOAA) ने अपने ताजा अपडेट में कहा कि अल नीनो की स्थितियां मई-जून के दौरान उभरने और साल के अंत तक बनी रहने की संभावना है.

अल नीनो आमतौर पर भारत में सूखे और गर्म मौसम से जुड़ा होता है. इसका असर बारिश पर देखा जाता है, कहीं-कहीं इससे भयंकर बारिश और बाढ़ की स्थिति भी बनती है. अल नीनो से मौसम का पूरा पैटर्न पूरी तरह बदल जाता है.

खरीफ बुवाई की तैयारियां

खरीफ की बुवाई अभी शुरुआती दौर में है. जिन क्षेत्रों में मॉनसून से पहले की बारिश हुई है, वहां किसानों ने जल्दी बुवाई के लिए खेतों को तैयार करना शुरू कर दिया है. सामान्य खरीफ बुवाई जून में शुरू होती है और दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आने और आगे बढ़ने के साथ जून-जुलाई में अपने चरम पर पहुंचती है.

जिला-वार इमरजेंसी योजनाएं

कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि सरकार जल्द ही पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए खादों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए देशव्यापी "खेत बचाओ अभियान" (फसलों को बचाने का अभियान) शुरू करेगी. सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए हैं कि बुवाई के अहम समय में खादों की कोई कमी न हो.

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