
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने आखिरकार पूरे देश को कवर कर लिया है. राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कुछ बाकी हिस्सों में भी मॉनसून की प्रगति पूरी होने के साथ अब भारत का पूरा इलाका मॉनसून के प्रभाव में आ गया है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले दिनों पश्चिम बंगाल में बने निम्न दबाव क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) के पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और मजबूत होने से मॉनसून को गति मिली.
मौसम विभाग के अनुसार, यह सिस्टम पहले पश्चिम बंगाल में बना, फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए डिप्रेशन में तब्दील हुआ और वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और उससे सटे क्षेत्रों में एक सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र (वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया) के रूप में सक्रिय है. एक दिन पहले यह उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश के ऊपर स्थित था.
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस सिस्टम के प्रभाव से मॉनसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति के करीब बनी हुई है. यही कारण है कि दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पिछले 24 घंटों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई है. दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ.
मौसम विभाग ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए विशेष चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि कई स्थानों पर 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश हो सकती है. उत्तराखंड में भी गुरुवार और शुक्रवार को अत्यधिक भारी बारिश होने का अनुमान है. पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, नदियों और नालों के उफान पर आने और सड़क बाधित होने की आशंका के मद्देनजर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए आज ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग के अनुसार राजधानी में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है. गुरुवार को बारिश की तीव्रता कुछ कम रहने का अनुमान है और इसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. इसके बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है. हालांकि आसमान में बादल छाए रहने की स्थिति बनी रह सकती है.
हिमाचल प्रदेश में अगले छह से सात दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है. वहीं उत्तराखंड में दो दिनों तक अत्यधिक भारी बारिश के बाद बारिश की तीव्रता कुछ कम हो सकती है, लेकिन भारी बारिश का दौर बना रहेगा.
पंजाब और हरियाणा में भी आगामी दिनों में मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान है. किसानों और स्थानीय प्रशासन को मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है.
मौसम विभाग के अनुसार, कुछ दिन पहले महाराष्ट्र, गुजरात और तटीय कर्नाटक के ऊपर सक्रिय रहे शियर जोन और निम्न दबाव प्रणाली के कारण अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की जा रही थी. लेकिन अब मुख्य मौसम प्रणाली उत्तर भारत की ओर खिसक चुकी है.
इसी कारण पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता में कमी आने लगी है. विशेष रूप से मुंबई के लिए फिलहाल किसी महत्वपूर्ण या अत्यधिक बारिश की संभावना नहीं जताई गई है. मौसम विभाग का कहना है कि आज से मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहेंगी.
लगातार बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों को खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करने, सब्जी और बागवानी फसलों को जलभराव से बचाने और मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन पर नजर रखने की सलाह दी गई है. पहाड़ी राज्यों में रहने वाले लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने को कहा गया है.