
सितंबर 2026 में देशभर में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर पड़ सकता है और पूरे भारत में मासिक बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, सितंबर में देश की कुल बारिश 1971-2020 के औसत से 91 प्रतिशत से कम रह सकती है. देश के बड़े हिस्से में बारिश की कमी का संकेत है, जबकि कुछ क्षेत्रों में बेहतर बारिश की संभावना बनी हुई है. हालांकि, पूरे देश में एक जैसी स्थिति नहीं रहेगी. उत्तर-पश्चिम, पूर्वोत्तर, पूर्वी, पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है. सितंबर महीने में देशभर की सामान्य औसत बारिश 167.9 मिमी मानी जाती है.
मौसम विभाग के मुताबिक, सितंबर खरीफ फसलों के लिए बेहद अहम महीना होता है, ऐसे में बारिश की कमी किसानों की मुश्किल बढ़ा सकती है. मौसम विभाग ने भी माना है कि सामान्य से कम बारिश का असर कृषि, जल संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है. धान, दलहन, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों में जहां नमी की जरूरत अधिक है, वहां बारिश की कमी फसल की बढ़वार और अंतिम उत्पादन पर दबाव डाल सकती है.
बारिश कमजोर रहने की आशंका के बीच किसानों के लिए उपलब्ध पानी का बेहतर प्रबंधन महत्वपूर्ण हो जाएगा. जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा है, वहां जरूरत के हिसाब से पानी देने और मिट्टी की नमी बचाने पर जोर देना होगा.
IMD ने भी जल संरक्षण, संसाधनों के कुशल प्रबंधन और कृषि के लिए समय रहते वैकल्पिक योजना तैयार करने की जरूरत बताई है. किसानों के लिए जिला स्तरीय मौसम पूर्वानुमान और कृषि-मौसम सलाह का इस्तेमाल इस स्थिति में ज्यादा अहम हो सकता है.
सितंबर में सिर्फ बारिश ही चिंता का कारण नहीं होगी, बल्कि तापमान भी किसानों और आम लोगों की मुश्किल बढ़ा सकता है. IMD के अनुसार, देश के ज्यादातर हिस्सों में सितंबर का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है. यानी दिन के समय सामान्य से ज्यादा गर्मी महसूस हो सकती है और बारिश की कमी वाले क्षेत्रों में गर्मी का दबाव और बढ़ सकता है.
सितंबर में देश के ज्यादातर हिस्सों में औसत न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है. हालांकि, उत्तर-पश्चिम, पश्चिम-मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है. दिन और रात दोनों के तापमान में बढ़ोतरी फसलों में गर्मी के तनाव का जोखिम बढ़ा सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बारिश की कमी बनी रहेगी.
मौसम विभाग के अनुसार, इस समय भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मजबूत अल नीनो की स्थिति बनी हुई है और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है. वहीं, हिंद महासागर में फिलहाल इंडियन ओशन डायपोल (IOD) की स्थिति न्यूट्रल है. IMD के मॉडल के अनुसार, सितंबर तक यह स्थिति बनी रह सकती है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्रों के पूर्वानुमान सितंबर से पॉजिटिव IOD की ओर बदलाव का संकेत दे रहे हैं, जो बारिश के लिए अच्छा संकेत साबित हाे सकता है.