अगस्त-सितंबर में बदल सकता है मॉनसून का मिजाज, अल नीनो के असर से कई इलाकों में घटेगी बारिश!

अगस्त-सितंबर में बदल सकता है मॉनसून का मिजाज, अल नीनो के असर से कई इलाकों में घटेगी बारिश!

मॉनसून के पहले आधे हिस्से में जून कमजोर और जुलाई बेहतर रहा, लेकिन अगस्त-सितंबर में अल नीनो का प्रभाव बढ़ सकता है. ECMWF के अनुसार मध्य और पश्चिमी भारत में भारी बारिश घट सकती है, जबकि उत्तर भारत, हिमालयी राज्यों और पूर्वोत्तर में बारिश का फोकस बढ़ने की संभावना है.

क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Aug 04, 2026,
  • Updated Aug 04, 2026, 11:22 AM IST

मॉनसून का आधा समय बीत चुका है और इस दौरान मौसम में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. जून का महीना बहुत खराब रहा, जबकि जुलाई - जो आम तौर पर सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना होता है - काफी अच्छा रहा. बारिश में यह अंतर मॉनसून और लगातार मजबूत हो रहे 'अल नीनो' के बीच चल रही खींचतान का नतीजा है.

सीजन के दूसरे हिस्से में स्थिति बदल सकती है. अगस्त (दूसरा सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना) और सितंबर (जब मॉनसून लौटना शुरू होता है) अभी बाकी हैं. ग्लोबल वेदर मॉडल बताते हैं कि 'अल नीनो' आखिरकार भारत में बारिश पर अपना पूरा असर दिखाना शुरू कर सकता है. इस बदलाव के शुरुआती संकेत भी दिखने लगे हैं.

बारिश कम होने की संभावना

'यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट' (ECMWF) का अनुमान है कि मध्य भारत, पश्चिमी भारत और पश्चिमी तट पर भारी से बहुत भारी बारिश वाला इलाका धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ेगा और उत्तर की ओर खिसक जाएगा. इसके बाद बारिश का केंद्र हिमालयी राज्यों (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड), उत्तर प्रदेश और बिहार के पहाड़ी इलाकों और मैदानी इलाकों, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों की ओर बढ़ने की उम्मीद है.

मौसम का मौजूदा पैटर्न भी इसी बात की पुष्टि करता है. दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर बना बारिश लाने वाला कम दबाव का क्षेत्र (low-pressure area) कमजोर पड़ गया है और अब मध्य राजस्थान के ऊपर एक सर्कुलेशन (हवा का चक्र) बना हुआ है. जम्मू क्षेत्र में पहले से मौजूद 'वेस्टर्न डिस्टर्बेंस' (पश्चिमी विक्षोभ) के साथ इसके मेल से अगले कुछ दिनों में इस इलाके में बड़े पैमाने पर बारिश हो सकती है.

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ)

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि मंगलवार से इस इलाके पर एक नया डिस्टर्बेंस असर डालेगा. मॉनसून ट्रफ (मॉनसून की कम दबाव वाली रेखा) की बदलती स्थिति भी उतनी ही अहम है. यह अब बीकानेर से दिल्ली, लखनऊ, पटना और पूर्व की ओर मणिपुर तक फैली हुई है. इसका पूर्वी सिरा पूरी तरह से ज़मीन के ऊपर आ गया है, जिससे बंगाल की खाड़ी से इसका संपर्क टूट गया है. बंगाल की खाड़ी ही बारिश लाने वाले 'कम दबाव के क्षेत्रों' (lows) का मुख्य स्रोत होती है.

अगला 'कम दबाव का क्षेत्र' बनने तक इस ट्रफ के वापस समुद्र के ऊपर आने की संभावना कम है. फिर भी, जमीन के ऊपर ट्रफ की स्थिति हिमालय की तलहटी, पूर्वोत्तर क्षेत्र, पूर्वी भारत और पूर्वी तट के कुछ हिस्सों (जिसमें तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और तटीय आंध्र प्रदेश शामिल हैं) में बारिश कराती रहेगी. कमजोर पड़ते मानसून के दौरान यह एक सामान्य पैटर्न है.

बारिश का पूर्वानुमान

इन हालात को देखते हुए, IMD ने अगले तीन दिनों तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कहीं-कहीं भारी बारिश का अनुमान जताया है. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में छह दिन, पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में चार दिन, और हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में तीन दिन.

पूर्वी भारत में, अगले पांच दिनों तक पश्चिम बंगाल और सिक्किम के पहाड़ी इलाकों, ओडिशा और झारखंड में और तीन दिनों तक बिहार में काफी ज्यादा से लेकर व्यापक बारिश का अनुमान है. मॉनसून के कमजोर दौर में आम तौर पर होने वाली गतिविधियों के तहत, सोमवार को पश्चिम बंगाल और सिक्किम के पहाड़ी इलाकों में, तीन दिनों तक पश्चिम बंगाल और झारखंड में, और छह दिनों तक बिहार में आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज़ हवाएं चलने की संभावना है.

बिजली कड़कना, आंधी-तूफान

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मंगलवार से शुरू होकर पांच दिनों तक 50-60 किमी/घंटा की रफ़्तार से हवाएं चलने और 70 किमी/घंटा तक के झोंके आने के साथ आंधी-तूफान आने की संभावना है.

पूर्वोत्तर में, बुधवार से तीन दिनों तक अरुणाचल प्रदेश में कहीं-कहीं भारी बारिश का अनुमान है.बुधवार और शनिवार से दो दिनों तक असम और मेघालय में और बुधवार से चार दिनों तक नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश का अनुमान है. मंगलवार को अरुणाचल प्रदेश में और मंगलवार को असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बहुत भारी बारिश की संभावना है.

दक्षिण भारत में बारिश

दक्षिण भारत में भी मॉनसून की छिटपुट गतिविधियां जारी रहेंगी. अगले पांच दिनों तक तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, उत्तर और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, तेलंगाना, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कहीं-कहीं से लेकर छिटपुट बारिश का अनुमान है. साथ ही लक्षद्वीप में गुरुवार से तीन दिनों तक बारिश होने की संभावना है.

मध्य भारत में, अगले पांच दिनों तक छत्तीसगढ़ में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है. गुरुवार से तीन दिनों तक पश्चिमी मध्य प्रदेश में, बुधवार से चार दिनों तक पूर्वी मध्य प्रदेश में और सोमवार से शुरू होकर छह दिनों तक छत्तीसगढ़ में भारी बारिश हो सकती है. शुक्रवार से दो दिनों तक पश्चिमी मध्य प्रदेश में, मंगलवार से पांच दिनों तक पूर्वी मध्य प्रदेश में और गुरुवार से तीन दिनों तक विदर्भ में बारिश काफी बड़े इलाके में या पूरे इलाके में हो सकती है.

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