बारिश की कमी और बढ़ती गर्मी से बिहार में धान खेती पर संकट, नर्सरी बचाना बना बड़ी चुनौती

बारिश की कमी और बढ़ती गर्मी से बिहार में धान खेती पर संकट, नर्सरी बचाना बना बड़ी चुनौती

बिहार में मॉनसून आने के बावजूद कम बारिश और लगातार बढ़ते तापमान ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कई जिलों में पारा 45 डिग्री तक पहुंचने से धान की नर्सरी बचाना बड़ी चुनौती बन गया है, जबकि किसानों को लगातार सिंचाई करनी पड़ रही है. मौसम विभाग ने जून में सामान्य से 40% कम बारिश का अनुमान जताया है, जिससे धान उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है.

DSR तकनीक से धान की रोपाईDSR तकनीक से धान की रोपाई
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna,
  • Jun 26, 2026,
  • Updated Jun 26, 2026, 12:54 PM IST

बिहार में वैसे तो मॉनसून का आगमन हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद राज्य का तापमान जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसी रफ्तार से बारिश का ग्राफ नीचे गिर रहा है. राज्य के कुछ जिलों में गर्मी का असर इस कदर है कि तापमान 45 से 46 डिग्री तक भी पहुंच गया है. इस बढ़ते तापमान के बीच किसानों की नजर एक ओर आसमान और दूसरी ओर नहर की ओर लगी हुई है कि इन दोनों रास्तों में से कहीं न कहीं से पानी खेतों तक पहुंचे, जिससे सिंचाई आसानी से खेतों की जा सके और धान की खेती का श्रीगणेश हो सके. हालांकि, मौसम विभाग के द्वारा जून महीने में सामान्य से कम, करीब 40 फीसदी बारिश होने का अनुमान लगाया गया है. वहीं, मौसम विभाग द्वारा आने वाले दिनों में भी बहुत अच्छी बारिश का कोई पूर्वानुमान जारी नहीं किया गया है.

उत्तर बिहार की तुलना में दक्षिण बिहार में पारा ऊपर

मौसम विभाग, पटना द्वारा जारी दैनिक रिपोर्ट पर नजर डालें तो 1 जुलाई तक उत्तर बिहार की तुलना में दक्षिण बिहार के अधिकांश जिलों का अधिकतम तापमान 42 डिग्री से लेकर 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जिसमें दक्षिण-पूर्व बिहार के जिले भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर और खगड़िया का तापमान अधिकतम 36 से 32 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है. जबकि उत्तर बिहार के जिलों का तापमान नए महीने की पहली तारीख तक अधिकतम 38 डिग्री सेल्सियस से लेकर 32 डिग्री सेल्सियस के बीच या इससे भी कम रहने का अनुमान है. वहीं, मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन-चार दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस तक कमी आने का अनुमान है.

धान का कटोरा कहे जाने वाले जिलों में तापमान अधिक

राज्य के दक्षिण-पश्चिम बिहार यानी औरंगाबाद, अरवल, बक्सर, भोजपुर, रोहतास और कैमूर जिले धान का कटोरा कहे जाने वाले जिले हैं. यहां  धान की खेती बड़े स्तर पर होती है, लेकिन इन दिनों इन जिलों का तापमान बिहार के अन्य जिलों की तुलना में काफी अधिक है. विशेष तौर पर कैमूर का तापमान, जहां बीते 24 घंटों के दौरान 43 डिग्री से अधिक रहा, वहीं न्यूनतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा. बक्सर सहित रोहतास, भोजपुर, अरवल और औरंगाबाद का अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस से लेकर 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा.

धान का बिजड़ा बचाना किसानों के लिए बना चैलेंज

किसान संतोष सिंह करीब 100 बीघा से अधिक एरिया में धान की खेती करते हैं, लेकिन वह बताते हैं कि हाल के समय में धान के बिजड़े को बचाना अपने आप में एक बड़ा चैलेंज बनता जा रहा है. लगातार बढ़ते तापमान और बारिश के गिरते ग्राफ की वजह से धान का बिजड़ा बचाने के लिए लगातार सिंचाई की जा रही है. हर एक दिन के अंतराल पर धान की नर्सरी में पानी दिया जा रहा है. 

वहीं, भोजपुर जिले के किसान राकेश कुमार सिंह बताते हैं कि धान का बीज लाल हो रहा है. इसके लाल होने की वजह कृषि वैज्ञानिक प्रवीण कुमार द्विवेदी बताते हैं कि पौधों में संक्रमण हो रहा है और इसका एक बड़ा कारण बढ़ता तापमान है. हाल के समय में जिस तरह का वातावरण है, वह फफूंद की बढ़ोतरी के लिए काफी अनुकूल है. इसलिए यदि किसानों को धान की नर्सरी में इस तरह की दिक्कत आ रही है, तो वे फफूंदनाशक दवाओं का उपयोग करें.

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