2 हजार रुपये की नौकरी से लाखों की कमाई का सफर, पढ़िए UP की महिला किसान की सफल कहानी

2 हजार रुपये की नौकरी से लाखों की कमाई का सफर, पढ़िए UP की महिला किसान की सफल कहानी

Success Story: बीएड तक पढ़ाई करने वाली सीता ने आगे बताया कि शुरुआत उन्होंने महज 400 रुपये के बीज से की थी, लेकिन सही देखभाल और बाजार की समझ के चलते उनका उत्पादन बढ़ता गया. इन फसलों की बाजार में अच्छी मांग होने के कारण उन्हें बेहतर कीमत भी मिलने लगी.

women farmer sita devi of sitapur earning in lakhs per year by medicinal farming crop women farmer sita devi of sitapur earning in lakhs per year by medicinal farming crop
नवीन लाल सूरी
  • LUCKNOW,
  • Apr 22, 2026,
  • Updated Apr 22, 2026, 7:06 AM IST

कभी प्राइवेट स्कूल में टीचर की नौकरी से 2 हजार रुपये की कमाई करने वाली उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के भिनैनी गांव की रहने वाली सीता देवी आज औषधीय खेती के जरिए सालाना 2 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रही हैं. जहां देश में ज्यादातर महिलाएं घर का काम संभालती हैं, वहीं, सीतापुर की एक महिला ने एक कामयाब किसान बनकर लोगों को हैरान कर दिया है. भिनैनी गांव की रहने वाली सीता ने इंडिया टुडे के किसान तक से बातचीत में बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) सीतापुर से खेती का प्रशिक्षण लेने के बाद एक साल पहले कैमोमाइल और ब्लू कॉर्न (औषधीय मक्का) की खेती 1.5 बीघा बंजर जमीन में शुरू किया था. उन्होंने बताया कि ब्लू कॉर्न के फूलों को सूखाकर बेचा जाता है. 

मेरी जमीन अब बंजर नहीं रही

सीता बताती हैं कि वर्तमान में हम औषधीय खेती के साथ कृषि सखी की नौकरी भी कर रहे हैं. वहीं कृषि सखी से 5 हजार रुपये मिलते है. उन्होंने बताया कि कैमोमाइल और ब्लू कॉर्न की फसल का बंपर उत्पादन हुआ. मेरी जमीन अब बंजर नहीं रही, क्योंकि हम पूरी तरह से प्राकृतिक खेती (गोबर, गोमूत्र) का फॉर्मूला अपनाया. जहां मुझे बहुत अच्छी सफलता मिली.

जैविक खाद, गोबर और पोषक तत्वों का प्रयोग

भिनैनी गांव की रहने वाली सीता ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र विशेषज्ञों की सलाह लेकर मिट्टी की जांच करवाई और उसमें जैविक खाद, गोबर और पोषक तत्वों का संतुलन सुधारने पर काम किया. धीरे-धीरे जमीन की उर्वरता बढ़ी और उन्होंने औषधीय खेती करना शुरू कर दिया. इस साल ब्लू कॉर्न की खेती किया. उन्होंने बताया कि सीतापुर के बिसवां में स्थित एफपीओ के माध्यम से हमारी फसल की बिक्री होती है. सीता ने बताया कि आज उनकी सालाना आय करीब 2 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है. 

सही देखभाल और बाजार की समझ से बढ़ा उत्पादन

बीएड तक पढ़ाई करने वाली सीता ने आगे बताया कि शुरुआत उन्होंने महज 400 रुपये के बीज से की थी, लेकिन सही देखभाल और बाजार की समझ के चलते उनका उत्पादन बढ़ता गया. इन फसलों की बाजार में अच्छी मांग होने के कारण उन्हें बेहतर कीमत भी मिलने लगी.

सफल महिला किसान के रूप में बनाई पहचान

उन्होंने अपनी आय को दोगुना करने के लिए बीज उत्पादन और उसकी बिक्री का मॉडल भी अपनाया. यही वजह हैं कि आज सीता देवी अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में एक सफल महिला किसान के रूप में पहचानी जाती हैं. उन्होंने बताया कि अब ब्लू कॉर्न की खेती से अच्छी आमदनी हो रही है और हम आत्मनिर्भर बन रहे हैं.

ये भी पढ़ें-

किसानों का फायदा या गोदामों का बोझ...क्या है गेहूं नीति में बदलाव के पीछे की असली कहानी?

Train Late: छुट्टा पशुओं की वजह से चार साल में लेट हुईं सवा लाख से ज्यादा ट्रेन

MORE NEWS

Read more!