
देसी घी ₹30,000 प्रति किलो! पहली नजर में यह आंकड़ा किसी को भी हैरान कर सकता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के झांसी की रहने वाली तान्या बंसल ने इसे हकीकत बना दिखाया है. अमेरिका से उच्च शिक्षा हासिल करने वाली और पेशे से सीए (CA) तान्या ने किसी मल्टीनेशनल कंपनी में ऊंची सैलरी वाली नौकरी चुनने के बजाय भारतीय देसी गायों के संरक्षण और पारंपरिक डेयरी को अपना जीवन समर्पित कर दिया.
तान्या की पढ़ाई अमेरिका में हुई थी और उनकी सोच बेहद आधुनिक रही है.वर्ष 2018 में जब उनकी शादी झांसी में हुई, तो उन्होंने देखा कि परिवार की पैतृक गौशाला घाटे से जूझ रही थी और उसकी स्थिति ठीक नहीं थी. तान्या ने बाहर नौकरी करने के बजाय अपने ससुर की इस गौशाला का कायाकल्प करने का फैसला किया. उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट और फाइनेंशियल समझ का इस्तेमाल करते हुए गौशाला के मैनेजमेंट को पूरी तरह प्रोफेशनल और आधुनिक रूप दिया. नतीजा यह हुआ कि घाटे में चल रहा फार्म न सिर्फ मुनाफे में आया, बल्कि आज 'A2 दूध' और दो तरह के प्रीमियम देसी घी का एक बड़ा ब्रांड बन चुका है.
बिना किसी सरकारी मदद के तान्या ने अपनी मेहनत से आज 350 से अधिक शुद्ध देसी नस्ल (गिर और साहीवाल) की गायों का विशाल फार्म तैयार कर लिया है.फार्म में 'जीरो वेस्ट' मॉडल अपनाया जाता है, जहां गोबर से लेकर गोमूत्र तक हर चीज का वैज्ञानिक और उपयोगी इस्तेमाल होता है. शुरुआत में अमेरिका से लौटीं तान्या को हिंदी बोलने में काफी मुश्किलें आती थीं, लेकिन आज वे न सिर्फ धाराप्रवाह हिंदी बोलती हैं, बल्कि उनका दिन का अधिकतर समय इन गायों के बीच ही गुजरता है. उनका गायों के साथ ऐसा भावनात्मक रिश्ता है कि नाम पुकारते ही गायें दौड़कर उनके पास आ जाती हैं.
गौशाला में मौजूद गायों में 'आदिशक्ति' और 'पवित्रा' नाम की दो गायें बेहद खास हैं. तान्या इन दोनों गायों को नियमित रूप से 6 दुर्लभ व चुनिंदा आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां खिलाती हैं.इन जड़ी-बूटियों के असर से गायों का स्वास्थ्य तो बेहतर रहता ही है, साथ ही उनके दूध और उससे पारंपरिक विधि से बनने वाले घी में भी औषधीय गुण आ जाते हैं.
इसी वजह से इस खास घी को 'जड़ी-बूटी घी' (Herbal Ghee) नाम दिया गया है, जिसकी कीमत ₹30,000 प्रति किलो रखी गई है.सीमित उत्पादन के चलते रोजाना केवल लगभग 750 मिलीलीटर घी ही तैयार हो पाता है.इस प्रीमियम घी को एक विशेष सुरक्षित बॉक्स में पैक करके ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है.
तान्या का कहना है कि यह घी औषधीय गुणों से भरपूर है और लोगों की सेहत व इम्युनिटी पर इसका बहुत सकारात्मक असर दिख रहा है. देश भर के स्वास्थ्य-प्रेमी और विशिष्ट ग्राहकों के बीच इसकी मांग इतनी अधिक है कि इसके लिए लगभग 90 दिनों (3 महीने) की एडवांस वेटिंग चल रही है. तान्या बंसल की यह प्रेरक यात्रा साबित करती है कि अगर आधुनिक शिक्षा और विजन को पारंपरिक भारतीय कृषि व पशुपालन से जोड़ दिया जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सुनहरे अवसर गढ़े जा सकते हैं.