
सम्राट चौधरी सरकार ने नदियों में गाद (सिल्ट) जमा होने की समस्या से निपटने और राज्य में बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए एक नई नीति शुरू की है. 'बिहार जल संसाधन बहाली और गाद प्रबंधन नीति 2026' (Bihar Water Resources Restoration and Silt Management Policy 2026) के तहत, वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करके नदियों, बैराजों और जलाशयों से गाद निकाली जाएगी. निकाली गई इस सामग्री का उपयोग सड़क निर्माण और तटबंध (embankment) परियोजनाओं में किया जाएगा.
बिहार के लिए बाढ़ दशकों से एक बड़ी चुनौती रही है. हर साल कई जिलों में बाढ़ आती है, जिससे घरों, फसलों और बुनियादी ढांचे (infrastructure) को नुकसान पहुंचता है. नदियों में गाद का जमा होना एक ऐसा कारण है जो उनकी पानी ले जाने की क्षमता को प्रभावित करता है. इस समस्या को हल करने के लिए, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने 'बिहार जल संसाधन बहाली और गाद प्रबंधन नीति 2026' पेश की है.
इस नई नीति के तहत, वैज्ञानिक तरीके से ड्रेजिंग (dredging) करके नदियों, बैराजों और जलाशयों से गाद निकाली जाएगी. सरकार को उम्मीद है कि इससे नदियों की पानी ले जाने की क्षमता बेहतर होगी और बाढ़ का खतरा कम करने में मदद मिलेगी. इस नई नीति की एक मुख्य विशेषता यह है कि नदियों से निकाली गई गाद का योजनाबद्ध तरीके से उपयोग किया जाएगा.
इसे बेकार (कचरा) मानने के बजाय, उपयुक्त गाद और मिट्टी का इस्तेमाल सड़क निर्माण, तटबंध परियोजनाओं और मरम्मत कार्यों में किया जाएगा.
सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से दो उद्देश्य पूरे होंगे- नदियों की सफाई होगी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए निर्माण सामग्री मिलेगी. इससे निर्माण लागत कम करने और सड़क विकास कार्यों में तेजी लाने में भी मदद मिल सकती है.
इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए, बिहार सरकार ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं.
इस समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे.
समझौते के तहत, बिहार की नदियों में ड्रेजिंग की जाएगी और निकाली गई उपयुक्त गाद का इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) परियोजनाओं में किया जाएगा. इस कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने बिहार की गाद प्रबंधन नीति की तारीफ भी की.
सरकार को उम्मीद है कि इस नीति से किसानों को भी फायदा होगा. नदियों के बेहतर प्रबंधन और पानी के सुचारू बहाव से गाद (सिल्ट) जमा होने से जुड़ी कुछ चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सकती है.
नदी से निकाली गई सामग्री का इस्तेमाल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स) में करने से अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने की भी उम्मीद है.
बाढ़ पर नियंत्रण बिहार की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, खासकर उत्तरी बिहार में, जहां हर साल कई जिले बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं. नई गाद प्रबंधन नीति, इस पुरानी समस्या से निपटने के लिए राज्य के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है.
हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ड्रेजिंग (गाद निकालने का काम) कितनी प्रभावी ढंग से की जाती है, निकाली गई गाद का प्रबंधन कैसे किया जाता है और क्या इस काम को नियमित रूप से लागू किया जाता है.
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह नई पहल आने वाले वर्षों में बिहार को बाढ़ के खतरों को कम करने और अपनी नदी प्रबंधन प्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करेगी.(रोहित कुमार सिंह की रिपोर्ट)