
गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के वैज्ञानिकों ने कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने जंगली मक्का एवं टियोसिंटे (Teosinte) के उपयोग से तीन उन्नत संकर चारा मक्का प्रजातियां विकसित की हैं. इनमें पंत संकर चारा मक्का-1, पंत संकर चारा मक्का-2 और पंत संकर चारा मक्का-3 शामिल हैं. इन प्रजातियों के विकास से पशुपालकों को पौष्टिक एवं गुणवत्तायुक्त हरा चारा उपलब्ध कराने के साथ ही किसानों के लिए चारा उत्पादन के नए विकल्प तैयार हुए हैं.
विश्वविद्यालय की इस उपलब्धि को पशुपालन और कृषि क्षेत्र की जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.वैज्ञानिकों का उद्देश्य ऐसी चारा मक्का प्रजातियां विकसित करना है, जो अधिक उत्पादन देने के साथ लंबे समय तक हरी रहें और पशुओं को बेहतर पोषण प्रदान करने में सहायक हों.
विश्वविद्यालय द्वारा विकसित तीनों उन्नत प्रजातियों में से पंत संकर चारा मक्का-1 और पंत संकर चारा मक्का-2 को विमोचित किया जा चुका है. साथ ही ये दोनों प्रजातियां भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित भी हो चुकी हैं. वहीं, तीसरी प्रजाति पंत संकर चारा मक्का-3 को अधिसूचित कराने की प्रक्रिया प्रगतिरत है.
इन प्रजातियों के विकास में जंगली मक्का और टियोसिंटे के आनुवंशिक गुणों का उपयोग किया गया है. इस शोध के माध्यम से वैज्ञानिकों ने चारा मक्का की ऐसी उन्नत किस्में विकसित करने का प्रयास किया है, जो किसानों और पशुपालकों की आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर विकल्प उपलब्ध करा सकें.
पशुपालन में हरे और पौष्टिक चारे की उपलब्धता का सीधा संबंध पशुओं के स्वास्थ्य एवं उत्पादन क्षमता से है. ऐसे में उन्नत चारा मक्का प्रजातियां किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। इनका प्रमुख उद्देश्य अधिक चारा उत्पादन, लंबे समय तक हरियाली और गुणवत्तायुक्त पशुचारा उपलब्ध कराना है.
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक इन प्रजातियों के संकर बीज उत्पादन की तकनीक विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं. इसके साथ ही इन प्रजातियों को किसानों तक पहुंचाने और विकसित तकनीक के व्यावसायीकरण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि शोध का लाभ प्रयोगशालाओं से निकलकर खेतों तक पहुंच सके.
इसी क्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने फसल अनुसंधान केन्द्र स्थित मक्का प्रजनन एवं बीज उत्पादन प्रायोगिक प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों से विकसित चारा मक्का प्रजातियों, अनुसंधान की प्रगति, संकर बीज उत्पादन तकनीक और प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की.
कुलपति ने वैज्ञानिकों को अनुसंधान कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया.उन्होंने विश्वविद्यालय की शोध टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए विकसित प्रजातियों एवं तकनीकों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया.
पंतनगर विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि कृषि अनुसंधान, चारा उत्पादन और पशुपालन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम है.जंगली मक्का एवं टियोसिंटे के उपयोग से विकसित इन तीनों प्रजातियों के माध्यम से गुणवत्तायुक्त पशुचारे के नए विकल्प तैयार हुए हैं.
यदि संकर बीज उत्पादन तकनीक और व्यावसायीकरण की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाता है, तो इससे इन उन्नत प्रजातियों की किसानों तक पहुंच आसान हो सकेगी. विश्वविद्यालय का यह प्रयास वैज्ञानिक अनुसंधान को खेती और पशुपालन की व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय पहल है.