
जंगल के अलावा खुले खेत भी सांपों के नैसर्गिक आवास होते हैं. हर साल बारिश का मौसम आते ही खेत में बने सांपों के बिलों में पानी भरने पर सांप बाहर आ जाते हैं. इसी समय खरीफ की फसलों को बोते समय किसानों पर सर्पदंश का खतरा बढ़ जाता है. इस खतरे के मद्देनजर सर्पदंश से किसानों की मौत होने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं. ऐसे पीड़ित परिवारों को हालांकि राज्य सरकारें सहायता राशि के तौर पर मुआवजा देती हैं, लेकिन सर्पदंश के अधिकांश मृतक, खेतिहर मजदूर होते हैं, इसलिए नियमों की जटिलता के कारण पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा पाना टेढ़ी खीर साबित होता है. इस जमीनी हकीकत को समझते हुए यूपी में योगी सरकार ने सर्पदंश के पीड़ित परिवारों को सहायता मुहैया कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला किया है. इसके तहत सरकार ने सर्पदंश से मौत को साबित करने के लिए विसरा टेस्ट की रिपोर्ट लगाने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है. योगी सरकार ने अब सिर्फ पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही मृतक आश्रित परिवार को निश्चित समय सीमा में मुआवजा देने का आदेश सभी जिला प्रशासन काे दिया है.
यूपी सरकार के मुआवजा संबंधी मौजूदा नियमों के तहत 2018 में सर्पदंश के मृतक आश्रित को 4 लाख रुपये मुआवजा देने का प्रावधान किया गया था. इसके लिए निर्धारित की गई मुआवजे की प्रक्रिया के तहत सर्पदंश को मौत की वजह साबित करने के लिए विसरा जांच हेतु रिपोर्ट को फॉरेंसिक लेब में भेजा जाता है. मृतक की विसरा जांच रिपोर्ट के इंतजार में पीड़ित परिवार को समय से वित्तीय सहायता नहीं मिल पाती है.
ये भी पढ़ें, Snake bite: मानसून के दौरान सर्पदंश से मौत का बढ़ने लगा है आंकड़ा, सांप काटने के बाद भूल कर भी ना करें ये काम
फॉरेंसिक स्टेट लीगल सेल ने शासन को स्पष्ट किया है कि विसरा जांच रिपोर्ट से सर्पदंश माैत होने की बात साबित भी नहीं होती है. इस वजह से स्टेट मेडिको लीगल सेल ने भी इस भ्रम को दूर करते हुए शासन को अवगत कराया है कि सर्पदंश से मृत्युु होने की दशा में विसरा जांच रिपोर्ट की कोई प्रासंगिकता नहीं है.
इसके मद्देनजर सिंह ने सभी जिलाें के स्थानीय प्रशासन से कहा है कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव कर सम्यक विचारोपरांत सर्पदंश के पीड़ित परिवार को वित्तीय सहायता मुहैया कराई जाए. इसके लिए उन्होंने एक निश्चित प्रक्रिया भी निर्धारित कर दी है. इसका पालन करते हुए सर्पदंश के पीड़ित परिवार को मुआवजा देना होगा.
ये भी पढ़ें, खेत में बहुत निकलता है कोबरा जैसा ये सांप, डसने से नहीं होती मौत, जाने वजह
सिंह द्वारा जारी आदेश में सर्पदंश से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने के लिए मामूली सी प्रक्रिया का पालन करना होगा. इसके फलस्वरूप 7 दिन के भीतर मृतक आश्रित को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है. आदेश में जिला प्रशासन द्वारा इस हेतु अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को भी निर्धारित कर दिया गया है.
इसके लिए जिला प्रशासन को सर्पदंश से हुई मौत का मामला संज्ञान में आने पर मृतक का पंचनामा कराना होगा. इसके बाद मृतक का पोस्टमार्टम कराकर मृतक आश्रितों की पहचान आदि सुनिश्चित कर 7 दिन के भीतर 4 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस प्रक्रिया के दाैरान पोस्टमार्टम के पश्चात मृतक की विसरा रिपोर्ट प्रिजर्व करने की कोई आवश्यकता नहीं है.