
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक बार फिर बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है. किसान तक (इंडिया टुडे समूह) और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से किसान कारवां 2.0 की शुरुआत 16 सितंबर से गोरखपुर से होगी. इस चरण में प्रदेश के अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में क्षेत्रीय किसान महासभाओं का आयोजन किया जाएगा.
किसान कारवां 2.0 की पहली किसान महासभा 16 सितंबर को गोरखपुर के योगीराज गंभीर नाथ प्रेक्षागृह में आयोजित होगी. कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे से होगी. कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे.
किसान कारवां 2.0 के तहत उत्तर प्रदेश के 9 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में किसान महासभाओं का आयोजन किया जाएगा. इन कार्यक्रमों में किसान, कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, विभागीय अधिकारी और एफपीओ से जुड़े प्रतिनिधि एक मंच पर आएंगे.महासभाओं में किसानों से उनकी खेती से जुड़ी समस्याओं, बाजार, सिंचाई, फसल बीमा, पशुपालन, तकनीक और सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर सीधा संवाद किया जाएगा.इस अभियान का प्रस्तावित समापन दिसंबर में लखनऊ में होगा.
किसान कारवां 2.0 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका आधार किसान कारवां 1.0 के दौरान मिले जमीनी फीडबैक को बनाया गया है.
किसान कारवां के पहले चरण में प्रदेश के सभी 75 जनपदों में किसान संवाद, चौपाल आयोजित की गई थीं. इस दौरान 40,757 किसानों से संवाद और सर्वेक्षण किया गया.
किसानों से सिंचाई की स्थिति, सरकारी योजनाओं की पहुंच, बाजार की समस्या, फसल बीमा और आजीविका जैसे मुद्दों पर जानकारी ली गई. किसानों से मिले इसी फीडबैक के आधार पर अब किसान कारवां 2.0 में क्षेत्रीय स्तर पर किसान महासभाओं का आयोजन किया जा रहा है.
किसान कारवां 2.0 में किसानों की भागीदारी को और मजबूत करने के लिए प्रत्येक कृषि जलवायु क्षेत्र से 20 प्रगतिशील, युवा और महिला किसानों का चयन किया जाएगा. इन किसानों को मिलाकर क्षेत्रीय किसान परिषद गठित की जाएगी. इसका उद्देश्य किसानों की समस्याओं और उनके अनुभवों को लगातार एक मंच पर लाना होगा. इसके साथ ही सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले किसानों के व्हाट्सऐप समूह बनाए जाएंगे.इन समूहों के माध्यम से किसानों की समस्याओं, सुझावों और फीडबैक का लगातार आदान-प्रदान किया जाएगा और जरूरी मुद्दों को शासन तक पहुंचाया जाएगा.
किसान महासभाओं में किसानों की उपलब्धियों को भी सम्मानित किया जाएगा. कृषि में नवाचार, जल संरक्षण, पशुपालन, आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और फसल विविधीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले किसानों को 'कृषिवीर सम्मान' दिया जाएगा. प्रत्येक क्षेत्र से 10 किसानों का चयन कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा. इसका उद्देश्य दूसरे किसानों को भी नई तकनीक और नए प्रयोग अपनाने के लिए प्रेरित करना है.
किसान कारवां 1.0 की शुरुआत 29 दिसंबर 2025 को अमरोहा जिले से हुई थी.इसके बाद कारवां ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों की यात्रा की और 4 मई 2026 को गौतम बुद्ध नगर में इसका समापन हुआ.
इस दौरान कारवां ने करीब 4500 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की और हजारों किसानों से सीधे संवाद किया. किसानों तक खेती के साथ-साथ पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई गई.
किसान कारवां के दौरान कई ऐसे किसान भी सामने आए, जिन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में काम किया.
किसान कारवां सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह किसानों के लिए ज्ञान और समाधान का चलता-फिरता मंच बना.अलग-अलग जिलों में कृषि वैज्ञानिकों, पशुपालन विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों ने किसानों से सीधे संवाद किया.
किसानों को आधुनिक खेती, संतुलित उर्वरक इस्तेमाल, फसल विविधीकरण, पशुपालन, बागवानी और दूसरी आय बढ़ाने वाली गतिविधियों की जानकारी दी गई. कई स्थानों पर किसानों को नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी जैसी नई तकनीकों के बारे में भी जानकारी मिली. विशेषज्ञों ने किसानों को समझाया कि खेत में जरूरत से ज्यादा उर्वरक डालने से उत्पादन हमेशा नहीं बढ़ता, बल्कि इससे मिट्टी की सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है.
किसान कारवां 2.0 का मकसद केवल किसानों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाना नहीं है. इस अभियान के जरिए किसानों की जमीनी समस्याओं और सुझावों को लगातार सरकार तक पहुंचाने की व्यवस्था तैयार की जा रही है. क्षेत्रीय किसान परिषद, किसान व्हाट्सऐप समूह और किसान महासभाओं के माध्यम से किसानों की आवाज को व्यवस्थित तरीके से शासन तक पहुंचाया जाएगा.
कुल मिलाकर, किसान कारवां 2.0 किसानों की बात को गांव से लेकर शासन तक पहुंचाने का एक नया मंच बनने जा रहा है. गोरखपुर से शुरू होने वाली पहली किसान महासभा के साथ इस अभियान का दूसरा चरण शुरू होगा, जो दिसंबर में लखनऊ में प्रस्तावित समापन तक प्रदेश के अलग-अलग कृषि क्षेत्रों से किसानों की आवाज और जमीनी अनुभवों को एक मंच पर लाएगा.