
देश में डेयरी सेक्टर को मजबूत करने के लिए शुरू की गई श्वेत क्रांति 2.0 का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है. अभियान के तहत देशभर में 24 हजार से ज्यादा नई डेयरी सहकारी समितियां बनाई जा चुकी हैं. इसके साथ ही 31 हजार से ज्यादा पुरानी समितियों को आधुनिक सुविधाओं और तकनीकी मदद से मजबूत किया गया है. राज्यसभा में एक लिखित जवाब में केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बताया कि श्वेत क्रांति 2.0 के तहत डेयरी सहकारी नेटवर्क का लगातार विस्तार किया जा रहा है. इसके जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और डेयरी क्षेत्र को ज्यादा संगठित बनाने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है. इससे छोटे पशुपालकों को दूध बेचने के लिए बेहतर बाजार मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी कारोबार को गति मिलेगी.
केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने बताया कि श्वेत क्रांति 2.0 के तहत सरकार ने देशभर में 75 हजार नई डेयरी सहकारी समितियां बनाने का लक्ष्य तय किया है. इसके अलावा 46,422 पहले से काम कर रही समितियों को मजबूत करने की योजना पर भी काम चल रहा है. खास बात यह है कि इस अभियान का फोकस उन गांवों और पंचायतों पर है, जहां अब तक डेयरी सहकारी व्यवस्था नहीं पहुंची थी. नई समितियों के जरिए ज्यादा से ज्यादा पशुपालकों को सहकारी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जा रही है.
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस योजना में बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को भी खास जगह दी गई है. बिहार में वर्ष 2024-25 के दौरान 2,320 नई डेयरी सहकारी समितियां बनाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले 2,222 समितियां बनाई गईं. वहीं, वर्ष 2025-26 में 3,000 नई समितियों का लक्ष्य तय किया गया है, जिनमें अब तक 1,875 समितियां बन चुकी हैं.
महाराष्ट्र की बात करें तो यहां वर्ष 2024-25 में 133 नई समितियां बनाने का लक्ष्य था, लेकिन 735 समितियों का गठन कर लक्ष्य से कई गुना बेहतर प्रदर्शन किया गया. हालांकि, वर्ष 2025-26 में 913 समितियों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 316 नई समितियां ही बन सकी हैं.
उन्होंने आगे बताया कि सरकार सिर्फ नई समितियां बनाने पर ही जोर नहीं दे रही, बल्कि पहले से काम कर रही डेयरी सहकारी समितियों को भी मजबूत किया जा रहा है. बिहार में वर्ष 2025-26 के लिए 2,985 समितियों को सशक्त बनाने का लक्ष्य था, जबकि अब तक 3,124 समितियों को मजबूत किया जा चुका है. महाराष्ट्र में 985 समितियों को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें अभी तक 244 समितियां शामिल हो पाई हैं.
डेयरी नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए बल्क मिल्क कूलर, ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम, दूध की गुणवत्ता जांचने वाले उपकरण, प्रोसेसिंग यूनिट और कोल्ड चेन जैसी सुविधाओं पर निवेश किया जा रहा है. डेयरी सहकारी समितियों को कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि दूध कलेक्शन और सप्लाई व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके.
श्वेत क्रांति 2.0 के तहत डेयरी कारोबार को टिकाऊ बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं. इसके लिए गोमय सहकारी समिति मल्टी-स्टेट लिमिटेड का गठन किया गया है, जो गोबर से बायोगैस और जैविक उर्वरक तैयार करने जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देगी. वहीं, कोऑपरेटिव इनपुट एंड सर्विसेज डिलीवरी मल्टी-स्टेट लिमिटेड के जरिए पशुपालकों को चारा, पशु स्वास्थ्य सेवाएं, प्रजनन सुविधा और तकनीकी सहायता कम लागत पर उपलब्ध कराने की योजना है.