हल्दी-अदरक की खेती पर किसानों को मिलेगा 49,800 रुपये तक अनुदान, ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर मिलेगा लाभ

हल्दी-अदरक की खेती पर किसानों को मिलेगा 49,800 रुपये तक अनुदान, ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर मिलेगा लाभ

बालोद जिले में खरीफ 2026-27 के लिए हल्दी और अदरक की खेती को बढ़ावा देने हेतु उद्यानिकी विभाग किसानों को 49,800 रुपये तक का अनुदान देगा. योजना का लाभ ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर मिलेगा.

धर्मेंद्र सिंह
  • Raipur ,
  • Jun 17, 2026,
  • Updated Jun 17, 2026, 5:39 PM IST

किसानों की आय बढ़ाने और जिले में मसाला फसलों के रकबे का विस्ताबालोद, 12 जून 2026र करने के उद्देश्य से उद्यानिकी विभाग बालोद द्वारा खरीफ वर्ष 2026-27 के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना लागू की गई है.राज्यपोषित मसाला क्षेत्र विस्तार योजना के अंतर्गत हल्दी और अदरक की खेती करने वाले किसानों को आकर्षक अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा.योजना का लाभ ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर दिया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक किसान समय पर आवेदन कर इस अवसर का लाभ उठा सकें.

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में इस वर्ष मसाला फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं.विभाग ने हल्दी के लिए 50 हेक्टेयर तथा अदरक के लिए 33 हेक्टेयर क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य रखा है.इन फसलों की बढ़ती बाजार मांग और बेहतर लाभ को देखते हुए किसानों को इनके उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

प्रमाणित बीजों पर मिलेगा अनुदान

सहायक संचालक उद्यानिकी ने बताया कि योजना के तहत केवल प्रमाणित एवं आधार बीज का उपयोग करने वाले किसानों को ही अनुदान का लाभ दिया जाएगा. गुणवत्तायुक्त बीजों के उपयोग से उत्पादन और फसल की गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है, जिससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होता है.

योजना के तहत हल्दी की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 25 क्विंटल बीज उपयोग करने पर किसानों को अधिकतम 47 हजार रुपये तक का अनुदान मिलेगा. वहीं अदरक की खेती में प्रति हेक्टेयर 15 क्विंटल बीज लगाने पर किसानों को 49 हजार 800 रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जाएगी.यह सहायता राशि किसानों की शुरुआती लागत को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

मसाला फसलें बन रही हैं आय का बेहतर स्रोत

विशेषज्ञों के अनुसार हल्दी और अदरक दोनों ही ऐसी नकदी फसलें हैं, जिनकी मांग घरेलू बाजार के साथ-साथ प्रसंस्करण उद्योगों में भी लगातार बनी रहती है. खाद्य पदार्थों, औषधीय उत्पादों और मसाला उद्योग में इनका व्यापक उपयोग होता है. यही कारण है कि पारंपरिक फसलों की तुलना में कई किसान अब मसाला फसलों की ओर रुख कर रहे हैं.

हल्दी और अदरक की खेती से किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त होने की संभावना रहती है. साथ ही इन फसलों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से अतिरिक्त आय के अवसर भी उपलब्ध होते हैं.राज्य सरकार की यह योजना किसानों को आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर प्रेरित करने का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है.

आवेदन के लिए करें संपर्क

योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान अपने नजदीकी शासकीय उद्यान रोपणी, विकासखंड स्तरीय उद्यानिकी कार्यालय अथवा उद्यानिकी विभाग के तकनीकी सहायकों से संपर्क कर सकते हैं.विभाग द्वारा किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी.

अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते आवेदन करें, क्योंकि योजना का लाभ निर्धारित लक्ष्य और उपलब्ध बजट के अनुसार ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर स्वीकृत किया जाएगा. समय पर आवेदन करने वाले किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी.

किसानों के लिए सुनहरा अवसर

राज्य सरकार द्वारा संचालित यह योजना न केवल मसाला फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि विविधीकरण को भी गति देगी. उद्यानिकी विभाग का मानना है कि अधिक किसान यदि हल्दी और अदरक जैसी लाभकारी फसलों को अपनाते हैं, तो जिले में कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

 

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