इसे कहते हैं सफलता... नौकरी छोड़कर शिवानी पटेल ने 'बनारसी हनी' को बनाया ब्रांड, पढ़ें इनकी स्टोरी

इसे कहते हैं सफलता... नौकरी छोड़कर शिवानी पटेल ने 'बनारसी हनी' को बनाया ब्रांड, पढ़ें इनकी स्टोरी

Success Story: शिवानी ने बताया कि, एक समय था जब वह निजी क्षेत्र में नौकरी करती थीं लेकिन उनका मन अपना व्यवसाय करने का था. इसके बाद उन्होंने अपने सपनों को व्यावसायिक रूप देने का निर्णय लिया और मधुमक्खी के महज 5 बक्सों से अपने सफर की शुरुआत की.

वाराणसी के ओदार गांव की शिवानी पटेलवाराणसी के ओदार गांव की शिवानी पटेल
नवीन लाल सूरी
  • LUCKNOW,
  • Mar 13, 2026,
  • Updated Mar 13, 2026, 8:03 AM IST

मधुमक्खी पालन (Beekeeping) ग्रामीण क्षेत्रों के मुनाफा देने वाले बिजनेस में से एक माना जाता है. बड़ी संख्या में किसान इस बिजनेस से जुड़कर बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं. योगी सरकार भी किसानों को इस बिजनेस को अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है. इसी क्रम में ‘नारी सशक्तीकरण’ और 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' के संकल्प को वाराणसी के ओदार गांव की शिवानी पटेल धरातल पर उतार रहीं हैं. मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना के जरिए शिवानी ने न केवल अपनी किस्मत बदली, बल्कि नारी सशक्तीकरण का जीवंत उदाहरण पेश किया है. उन्होंने मधुमक्खी पालन को आज 'बनारसी हनी' जैसे सफल ब्रांड में तब्दील कर दिया है.

मधुमक्खी के महज 5 बक्सों से शुरू किया सफर

शिवानी ने बताया कि, एक समय था जब वह निजी क्षेत्र में नौकरी करती थीं, लेकिन उनका मन अपना व्यवसाय करने का था. इसके बाद उन्होंने अपने सपनों को व्यावसायिक रूप देने का निर्णय लिया और मधुमक्खी के महज 5 बक्सों से अपने सफर की शुरुआत की. उन्होंने आगे बताया कि किसी भी नए व्यवसाय के लिए सबसे बड़ी बाधा पूंजी के इंतजाम की होती है.

‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना' से मिली बड़ी मदद

ओदार गांव की रहने वाली शिवानी के सपनों को तब पंख मिले जब उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (CM-YUVA)’ योजना के बारे में पता चला. योगी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से शिवानी को वित्तीय सहायता मिली. इस योजना के तहत शिवानी को ब्याजमुक्त ऋण मिला. वहीं सरकार के इस सहयोग ने मधुमक्खियों के और बक्से खरीदे. अब उनको अच्छी कमाई हो रही है. 

'मल्टी-फ्लोरल' और 'सरसों' जैसे कई प्रकार के शहद

शिवानी बताती हैं कि योजना के तहत ऋण का लाभ मिलने के बाद शहद का उत्पादन इतना बढ़ा कि उन्होंने अपना ब्रांड खड़ा कर लिया. वे खुद बक्सों की निगरानी करतीं हैं. उन्होंने बताया कि परिजनों की मदद से शहद निकालतीं हैं और उसकी शुद्धता सुनिश्चित करतीं हैं. उनके पास 'मल्टी-फ्लोरल' और 'सरसों' जैसे विभिन्न प्रकार के शहद उपलब्ध हैं. शिवानी पटेल की यात्रा यह साबित करती है कि यदि सही विजन और सरकार का साथ मिले तो महिलाएं किसी भी बाधा को पार कर सकती हैं. उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन सिर्फ आमदनी का जरिया ही नहीं, बल्कि यह समाज में भी मिठास घोलने का काम कर रही है.

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