
देश के कई हिस्सों में अल नीनो की आशंका और उससे जुड़े मौसमीय बदलाव किसानों की चिंता बढ़ा रहे हैं. अल नीनो सक्रिय होने पर सामान्य बारिश का पैटर्न प्रभावित हो जाता है, जिससे सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. इसके अलावा फसलों पर कीट और बीमारियों का प्रकोप बढ़ने का खतरा भी रहता है. ऐसे हालात में किसानों की उपज घट जाती है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. पीएम फसल योजना में रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 31 जुलाई है जबकि धान के लिए यह तारीख 15 अगस्त है.
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है, वहां अल नीनो का प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है. कम बारिश या लंबे सूखे के कारण फसलें खराब हो जाती हैं, जिससे किसानों की आय प्रभावित होती है और कई बार उन्हें कर्ज का सहारा लेना पड़ता है. ऐसे जोखिमों से बचने में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्राकृतिक आपदा, सूखा, बाढ़, बेमौसम बारिश, कीट प्रकोप, बीमारी और उत्पादन में भारी गिरावट जैसी परिस्थितियों में किसानों को आर्थिक सहायता दी जाती है. यदि अल नीनो के कारण मौसम में बदलाव से फसल को नुकसान पहुंचता है, तो बीमित किसान योजना के तहत मुआवजे का दावा कर सकते हैं.
मुआवजे की राशि से किसान अपने नुकसान की भरपाई कर सकते हैं. इसके साथ ही अगली फसल की बुवाई के लिए जरूरी संसाधन जुटा सकते हैं. यदि किसान पर खेती से जुड़ा लोन है तो बीमा राशि का उपयोग उसकी अदायगी में भी किया जा सकता है.
खरीफ फसलों के लिए किसानों को निर्धारित अंतिम तिथि से पहले बीमा कराना जरूरी है. योजना के तहत किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना पड़ता है. खरीफ फसलों के लिए केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है. बाकी पैसा केंद्र और राज्य सरकारें सब्सिडी के रूप में वहन करती हैं. किसान PMFBY पोर्टल, बैंक या अधिकृत केंद्रों के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. पोर्टल पर फसल और क्षेत्र के अनुसार प्रीमियम की जानकारी भी पाई जा सकती है.
यदि अल नीनो के कारण सूखा, कम बारिश, बाढ़ या अन्य मौसमीय कारणों से फसल को नुकसान होता है, तो किसानों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. किसान को फसल नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देनी होगी. सूचना बीमा कंपनी, कृषि विभाग, बैंक या PMFBY किसान ऐप के माध्यम से दी जा सकती है. इसमें नुकसान से संबंधित जरूरी दस्तावेज और विवरण उपलब्ध कराने होते हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म और चैटबॉट के जरिए शिकायत दर्ज करने और उसकी स्थिति जानने की सुविधा भी उपलब्ध है.
यदि कम बारिश या सूखे की स्थिति के कारण किसान बुवाई ही नहीं कर पाते हैं या बीज अंकुरित नहीं हो पाते, तो इसे प्रिवेंटेड सोइंग (Prevented Sowing) की श्रेणी में रखा जाता है. ऐसी स्थिति में योजना के नियमों के अनुसार किसान बीमित राशि का 25 प्रतिशत तक मुआवजा पाने के पात्र हो सकते हैं.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और बढ़ते जलवायु जोखिमों के दौर में फसल बीमा किसानों के लिए बेहद जरूरी हो गया है. अल नीनो के कारण होने वाले सूखे, उत्पादन में गिरावट और आर्थिक संकट से बचाव के लिए किसानों को समय रहते फसल बीमा कराना चाहिए. इससे न केवल खेती में होने वाले नुकसान की भरपाई संभव होती है, बल्कि किसान अगली फसल की तैयारी भी बिना आर्थिक दबाव के कर सकते हैं.