
देश में बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार समेकित बागवानी विकास मिशन (MIDH) योजना चला रही है. इस योजना के तहत किसानों को आधुनिक खेती तकनीक अपनाने, संरक्षित खेती करने और बेहतर उत्पादन के लिए आर्थिक एवं तकनीकी सहायता दी जा रही है. सरकार का लक्ष्य है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ फल, सब्जी और फूलों की व्यावसायिक खेती को भी बढ़ावा दें.
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, MIDH योजना के तहत किसानों को सिर्फ आर्थिक सहायता ही नहीं बल्कि खेती की नई तकनीकों की जानकारी और ट्रेनिंग भी दी जाती है. इसके लिए राज्य बागवानी मिशन, तकनीकी सहायता समूह (TSG), सटीक कृषि विकास केंद्र (PFDC), उत्कृष्टता केंद्र (CoE), आईसीएआर संस्थान, राज्य कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को सहयोग दिया जाता है.
इन संस्थानों की मदद से किसान आधुनिक तरीके से खेती करना सीखते हैं और कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं.
MIDH योजना के तहत संरक्षित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसमें पॉलीहाउस, शेड नेट हाउस, प्लास्टिक टनल और अन्य आधुनिक संरचनाओं के निर्माण के लिए किसानों को वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जाती है.
संरक्षित खेती की मदद से किसान मौसम की अनिश्चितताओं से बच सकते हैं और सालभर बेहतर गुणवत्ता वाली सब्जियों और अन्य बागवानी फसलों का उत्पादन कर सकते हैं. इस तकनीक से कम जगह में अधिक उत्पादन लेने में भी मदद मिलती है.
किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी देने और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए MIDH योजना के तहत देशभर में 61 फसल आधारित उत्कृष्टता केंद्र (Centers of Excellence) स्थापित किए गए हैं. इन केंद्रों को भारत-इजरायल सहयोग, भारत-नीदरलैंड सहयोग और विभिन्न शोध संस्थानों की मदद से विकसित किया गया है.
ये केंद्र किसानों के लिए ट्रेनिंग केंद्र के रूप में काम करते हैं. यहां किसानों को नई तकनीक, बेहतर पौध सामग्री और सब्जियों की उन्नत किस्मों की जानकारी दी जाती है.
MIDH योजना के मानव संसाधन विकास (HRD) घटक के तहत किसानों और खेतों में काम करने वाले कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं. इन कार्यक्रमों में किसानों को आधुनिक बागवानी तकनीक, फसल प्रबंधन और बेहतर उत्पादन के तरीकों की जानकारी दी जाती है.
सरकार का मानना है कि सही प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी मिलने से किसान बागवानी क्षेत्र में अधिक लाभ कमा सकते हैं.
बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) भी कई योजनाओं के माध्यम से किसानों और उद्यमियों को सहायता दे रहा है. इसके तहत स्वच्छ पौध कार्यक्रम और बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम जैसे प्रयास किए जा रहे हैं.
इसके अलावा व्यावसायिक स्तर पर बागवानी उत्पादन और प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने के लिए भी सहायता दी जाती है. इसमें पौध सामग्री, सिंचाई व्यवस्था, उर्वरक, मशीनरी और अन्य जरूरी सुविधाओं को शामिल किया गया है.
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में MIDH योजना से जुड़ी यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सरकार बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए संस्थागत ढांचे को लगातार बेहतर बना रही है.
MIDH योजना के जरिए किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने, उत्पादन बढ़ाने और बागवानी क्षेत्र को एक मजबूत कृषि व्यवसाय के रूप में विकसित करने पर सरकार का फोकस है.
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