Farm Loan Waiver: महाराष्ट्र में 2 लाख तक का फसल लोन होगा माफ, 56 लाख किसानों को मिलेगा फायदा!

Farm Loan Waiver: महाराष्ट्र में 2 लाख तक का फसल लोन होगा माफ, 56 लाख किसानों को मिलेगा फायदा!

सूत्रों ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को राहत देते हुए 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋण माफ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इस फैसले से करीब 56 लाख किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है. साथ ही समय पर फसल ऋण चुकाने वाले किसानों के लिए 50 हजार रुपये तक प्रोत्साहन राशि देने का भी निर्णय लिया गया है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 02, 2026,
  • Updated Jun 02, 2026, 4:53 PM IST

महाराष्ट्र सरकार ने मानसून से पहले किसानों को बड़ी राहत देने का फैसला लिया है. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋण माफ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है गई. इस फैसले से राज्य के करीब 56 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है. यह योजना 65 लाख से ज्‍यादा कृषि लोन खातों को कवर करेगी. इसके तहत करीब 56 लाख किसानों के कुल 36,585 करोड़ रुपये तक के कृषि लोन माफ किए जाएंगे. इससे किसानों पर कर्ज का बोझ कम होगा और खरीफ सीजन से पहले उन्हें राहत मिलेगी.

महायुति के चुनावी वादों में शामिल थी कर्जमाफी

कृषि लोन माफी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से पहले भाजपा नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन के प्रमुख वादों में शामिल रही थी. अब कैबिनेट स्तर पर इस फैसले को मंजूरी मिलना किसानों के लिए अहम माना जा रहा है. हालांकि, फिलहाल इस फैसले की आधिकारिक घोषणा होने की संभावना कम बताई जा रही है.

समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को 50 हजार प्रोत्‍साहन

इसकी वजह विधान परिषद चुनावों के चलते लागू आदर्श आचार संहिता को माना जा रहा है. वही, कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए उन किसानों को भी प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया है, जिन्होंने समय पर फसल लोन चुकाया है. ऐसे किसानों को अधिकतम 50 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.

आंदोलन के बाद कर्जमाफी पर मानी महायुति

मालूम हो कि बीते साल प्रहार जनशक्ति पार्टी के प्रमुख बच्‍चू कडू ने किसानों की कर्जमाफी को लेकर आंदोलन किया था. जिसे बाद महायुति सरकार ने कर्जमाफी के लिए कमेटी का गठन कर जून 2026 कर्जमाफी के ऐलान का वादा किया था. इसके बाद बच्चू कडू ने अपना आंदोलन वापस लिया था. वहीं, इस साल अप्रैल में उन्‍होंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्‍व वाली शिवसेना का हाथ थाम लिया और विधान परिषद के उम्‍मीदवार के लिए नामांकन भरा. (इनपुट- एजेंसी)

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