
देश के तीसरे सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य कर्नाटक ने सूखे से राहत के लिए पहली किश्त के तौर पर 1,250 करोड़ रुपये जारी किए हैं. इससे गन्ना उगाने वाले किसानों समेत अन्य किसानों को फसल के बड़े पैमाने पर नुकसान और पानी की कमी के बीच आर्थिक मदद मिलेगी. 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' ने रिपोर्ट दी है.
राजस्व विभाग संभालने वाले डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर ने बुधवार को होसापेटे तालुक के पोथालाकाट्टे गांव में सूखे से प्रभावित मक्के के खेतों का दौरा करते हुए इस राशि को जारी करने की घोषणा की. उन्होंने सूखे के असर का जायजा लेने के लिए किसानों से बातचीत भी की.
राज्य सरकार पहले ही 217 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर चुकी है, जबकि 23 अन्य तालुकों में जमीनी स्तर पर जांच चल रही है. परमेश्वर ने कहा कि सूखाग्रस्त तालुकों की सूची में 10 से 15 और तालुक जुड़ सकते हैं.
तय नियमों के अनुसार, पहली किश्त के तहत पात्र किसानों को दो से तीन दिनों के भीतर सीधे उनके बैंक खातों में 2,500 रुपये मिलेंगे.
यह राहत पैकेज ऐसे समय में आया है जब सूखे के हालात पूरे राज्य में खेती-बाड़ी पर बुरा असर डाल रहे हैं. इसमें गन्ना भी शामिल है, जो एक प्रमुख कमर्शियल फसल है और कई जिलों में किसानों की आय का अहम जरिया है.
सरकार ने पीने के पानी की व्यवस्था के लिए 306 करोड़ रुपये और आपातकालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए डिप्टी कमिश्नरों के पर्सनल डिपॉजिट अकाउंट में 329 करोड़ रुपये दिए हैं. चारे के इंतजाम के लिए 25 करोड़ रुपये और जारी किए गए हैं, साथ ही डिप्टी कमिश्नरों को जरूरत पड़ने पर गौशालाएं और चारा बैंक बनाने का अधिकार दिया गया है.
राज्य के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, सूखे से फसल और संपत्ति को कुल मिलाकर 50,000 करोड़ रुपये से 60,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
कर्नाटक ने नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (NDRF) के नियमों के तहत केंद्र से लगभग 10,000 करोड़ रुपये से 11,000 करोड़ रुपये की मांग की है. केंद्रीय टीमों ने हालात का जायजा लेने के लिए पहले ही सूखे से प्रभावित कई इलाकों का दौरा किया है और उम्मीद है कि वे केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी.
राज्य सरकार केंद्र से अंतरिम मदद मांगने की भी तैयारी कर रही है.