अब डीजल नहीं सूरज की रौशनी से होगी खेतों की सिंचाई, किसानों की होगी दोगुनी कमाई

अब डीजल नहीं सूरज की रौशनी से होगी खेतों की सिंचाई, किसानों की होगी दोगुनी कमाई

सरकारी सौर योजनाओं की बदौलत, भारत के किसान डीज़ल से सौर ऊर्जा की ओर बढ़ रहे हैं. PM-KUSUM योजना के तहत सौर पंप लगाकर, किसान अपनी सिंचाई का खर्च कम कर रहे हैं और साथ ही अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी कमा रहे हैं. इससे खेती ज़्यादा किफायती, आसान और पर्यावरण के अनुकूल बन रही है.

अब सूरज से होगी सिंचाईअब सूरज से होगी सिंचाई
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 13, 2026,
  • Updated Apr 13, 2026, 10:59 AM IST

भारत के गांवों में हर सुबह लाखों किसान अपने खेतों की सिंचाई के लिए डीजल पंप चलाते हैं. लेकिन यह काम आसान नहीं होता, क्योंकि डीजल बहुत महंगा हो चुका है. हरियाणा जैसे राज्यों में एक छोटे किसान को हर महीने करीब 8,000 से 12,000 रुपये तक सिर्फ डीजल पर खर्च करने पड़ते हैं. यही खर्च किसानों की कमाई को कम कर देता है और उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर बनाता है.

डीजल पंप से बढ़ती परेशानी

भारत में करीब 90 लाख डीजल से चलने वाले पंप हैं. ये पंप न सिर्फ महंगे हैं बल्कि पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक हैं. हर पंप से साल में काफी मात्रा में प्रदूषण फैलता है. पहले डीजल सस्ता था, लेकिन अब इसकी कीमत बहुत बढ़ गई है. ऐसे में किसानों के लिए खेती करना और भी मुश्किल हो गया है.

पीएम-कुसुम योजना से मिला समाधान

इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने साल 2019 में पीएम-कुसुम योजना शुरू की. इस योजना का मकसद किसानों को डीजल से हटाकर सौर ऊर्जा की तरफ ले जाना है. इस योजना के तहत किसानों को सोलर पंप दिए जाते हैं, जिससे वे बिना डीजल के अपने खेतों की सिंचाई कर सकें.

इस योजना के तीन हिस्से हैं. पहला, खेतों में सोलर प्लांट लगाना. दूसरा, डीजल पंप की जगह सोलर पंप देना. और तीसरा, बिजली से जुड़े पंपों को सोलर से जोड़ना. इस योजना पर सरकार ने हजारों करोड़ रुपये खर्च किए हैं और इसका फायदा लाखों किसानों तक पहुंच चुका है.

किसानों की बढ़ी कमाई और बचत

जब किसान सोलर पंप का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें डीजल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे उनकी सालाना करीब 60,000 रुपये तक की बचत हो सकती है. कई बार तो सोलर सिस्टम की लागत भी एक साल के अंदर ही निकल जाती है. इससे किसानों की आय बढ़ती है और उनका खर्च कम होता है.

हरियाणा बना मिसाल

हरियाणा ने इस योजना को बहुत अच्छे तरीके से अपनाया है. यहां किसानों को ज्यादा सब्सिडी दी जाती है, जिससे उन्हें सोलर पंप बहुत कम कीमत में मिल जाता है. किसान सिर्फ करीब 25% पैसा देते हैं और बाकी सरकार देती है. इसी वजह से हरियाणा में बड़ी संख्या में सोलर पंप लगाए जा चुके हैं और यह राज्य इस काम में आगे है.

अब बिजली भी बनेंगे किसान

आज सिर्फ सिंचाई ही नहीं, बल्कि किसान बिजली भी बना रहे हैं. अगर उनके पास ज्यादा सौर ऊर्जा बनती है, तो वे उसे बिजली ग्रिड को बेच सकते हैं. इससे किसानों को एक नई कमाई का रास्ता मिल रहा है.

इसके अलावा, पीएम सूर्य घर योजना के तहत घरों में भी सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, जिससे लोगों को मुफ्त बिजली मिलती है और बची हुई बिजली बेचकर पैसा भी कमाया जा सकता है.

खेती और बिजली साथ-साथ

अब एक नई तकनीक आ रही है, जिसे एग्रीवोल्टाइक्स कहते हैं. इसमें खेत के ऊपर सोलर पैनल लगाए जाते हैं और नीचे फसल उगाई जाती है. इससे जमीन का सही इस्तेमाल होता है और फसल को धूप से भी कुछ राहत मिलती है. इससे मिट्टी में नमी भी बनी रहती है.

सरकार अब इस योजना को और आगे बढ़ा रही है. नए बदलावों के तहत बैटरी सिस्टम जोड़ा जाएगा, जिससे दिन में बनी बिजली को बाद में इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि कुछ जगहों पर जानकारी और पैसे की कमी जैसी समस्याएं हैं, लेकिन सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है.

आज भारत सौर ऊर्जा के मामले में दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो चुका है. खेती में भी यह बदलाव साफ दिखाई दे रहा है. अब किसान सिर्फ डीजल पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर रहे हैं.

धीरे-धीरे वह समय आ रहा है जब किसान सुबह डीजल पंप नहीं चलाएगा, बल्कि अपनी बनाई बिजली बेचकर कमाई भी करेगा. यह बदलाव किसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है.

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