पटना में सूकर विकास योजना का पहला चरण पूरा, 48 लाभार्थियों को मिला स्कीम का लाभ

पटना में सूकर विकास योजना का पहला चरण पूरा, 48 लाभार्थियों को मिला स्कीम का लाभ

बिहार सरकार की सूकर विकास योजना के तहत पटना जिले में 48 अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को 144 उन्नत नस्ल के सूकर बांटे गए. यह पहल पशुपालकों की आय बढ़ाने, रोजगार बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है.

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अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna,
  • May 28, 2026,
  • Updated May 28, 2026, 5:01 PM IST

बिहार सरकार पशुपालक किसानों की आय बढ़ाने और पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. इसी क्रम में पटना जिले में सूकर विकास योजना के तहत 48 अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को उन्नत नस्ल के सूकर दिए गए. यह योजना राज्य के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

सूकर विकास योजना का पहला चरण पूरा

पशुपालन निदेशालय के अंतर्गत जिला पशुपालन कार्यालय, पटना द्वारा बुधवार को सूकर विकास योजना के पहले चरण को पूरा किया गया. योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को 2 मादा और 1 नर सूकर दिए गए. इस तरह कुल 48 लाभार्थियों को 144 सूकर बांटे गए.

पशुपालन निदेशक उज्ज्वल कुमार सिंह और जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. अरुण कुमार ने कार्यक्रम में मौजूद रहकर लाभार्थियों को सूकर पालन की आधुनिक तकनीक, देखभाल और बाजार से जुड़ाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

कई प्रखंडों के लाभार्थियों को मिला लाभ

इस चरण में पालीगंज प्रखंड के 15, बिहटा प्रखंड के 8, फुलवारीशरीफ प्रखंड के 14, मसौढ़ी प्रखंड के 10 और फतुहा प्रखंड के 1 लाभार्थी को योजना का लाभ दिया गया. पटना जिले का कुल लक्ष्य अनुसूचित जाति के 75 और अनुसूचित जनजाति के 30 लाभार्थियों को लाभ पहुंचाना है. पहले चरण में 48 लाभार्थियों को शामिल कर योजना को गति दी गई है. बाकी लाभार्थियों को अगले चरणों में शामिल किया जाएगा.

आय वृद्धि और समावेशी विकास का लक्ष्य

सूकर विकास योजना अनुसूचित जाति और जनजाति के पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम साबित हो रही है. सूकर पालन अपेक्षाकृत कम निवेश में अच्छा मुनाफा देने वाला व्यवसाय है. उन्नत नस्ल के सूकरों से बेहतर उत्पादन, कम समय में वजन बढ़ना और अच्छा बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है. 

सरकार का मानना है कि इस योजना से ना सिर्फ लाभार्थियों की आय में वृद्धि होगी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे. सूकर पालन से जुड़े काम जैसे चारे का प्रबंधन, देखभाल, बिक्री आदि में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ने की भी उम्मीद है.

पशुपालन विभाग का प्रयास जारी

पशुपालन निदेशक उज्ज्वल कुमार सिंह ने कहा कि विभाग राज्य के पशुपालक किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है. सूकर विकास योजना इसी बड़े लक्ष्य का हिस्सा है. 

इस योजना के सफलता से लागू होने से ना सिर्फ अनुसूचित जाति के परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी बल्कि बिहार में पशुपालन क्षेत्र को नई दिशा भी मिलेगी. सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में ऐसी योजनाओं के जरिए अधिक से अधिक पिछड़े वर्ग के पशुपालक मुख्यधारा से जुड़ें और समृद्धि की राह पर आगे बढ़ें.

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