
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किसानों की आय बढ़ाने और बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में बागवानी के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नए कोर्स, आधुनिक तकनीक और विशेष योजनाएं शुरू की जाएंगी.
मुख्यमंत्री करनाल स्थित महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय में आयोजित 4 दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे. इस सम्मेलन का विषय क्वालिटी वाले बीज और रोपण सामग्री पर केंद्रित था.
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि बागवानी विश्वविद्यालय में पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, पौधों के कीट और रोग नियंत्रण जैसे विषयों पर मास्टर डिग्री और पीएचडी शुरू की जाएगी. इसके अलावा 14 नए हॉर्टिकल्चर साइंस सेंटर भी किसानों को समर्पित किए गए, जिससे उन्हें नई तकनीक और बेहतर पौध सामग्री मिल सकेगी.
सरकार ने 2030 तक बागवानी क्षेत्र को दोगुना और उत्पादन को तीन गुना करने का लक्ष्य रखा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक खेती के साथ अब फसल विविधीकरण और बागवानी आधारित खेती ही किसानों की आय बढ़ाने का भविष्य है.
राज्य सरकार ने कई नई योजनाएं भी शुरू करने की घोषणा की है, जिनमें 1000 एकड़ क्षेत्र में एरोपोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स और ग्रीनहाउस जैसी स्मार्ट तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके अलावा, ग्रामीण हाट मंडियों की स्थापना, जो FPOs के पैक हाउस से जुड़ी होंगी, 23 दिसंबर 2026 को पहली ग्रामीण हाट मंडी का उद्घाटन, कोल्ड चेन नीति लागू करने की योजना, जिससे भंडारण और निर्यात बढ़ेगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि आलू के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के लिए नया कानून लाया जाएगा, जिससे हर साल 7.5 लाख क्विंटल बीज उत्पादन सुनिश्चित होगा. साथ ही सोनीपत, करनाल, पानीपत, अंबाला और कुरुक्षेत्र में मशरूम उत्पादन को और बढ़ावा दिया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिकों से कहा कि वे ऐसे बीज विकसित करें जो कम पानी में अधिक उत्पादन दें और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल हों. उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी और सेंसर टेक्नोलॉजी को भविष्य का बड़ा साधन बताया.
इस मौके पर वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को विभिन्न पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे उनके योगदान को सराहा गया. मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन पहलों से हरियाणा में बागवानी क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी और किसानों की आय में बड़ा सुधार होगा.