
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” विजन और केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय लगातार देश के सहकारी ढांचे को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है. इसी दिशा में 27 मई 2026 को पुणे में एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें शुगर सेक्टर में सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई.
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) के पुणे क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान (VAMNICOM), पुणे में आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय सहकारिता और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने की.
इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र और कर्नाटक के करीब 31 सहकारी चीनी मिलों के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. बैठक में मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी बनाने के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई.
मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सहकारी चीनी मिलों को एकीकृत सर्कुलर इकॉनमी मॉडल के जरिए आगे बढ़ाना है. इससे गन्ने से निकलने वाले उप-उत्पादों (by-products) का बेहतर इस्तेमाल होगा और उन्हें अधिक मूल्य वाली चीजों में बदला जा सकेगा. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्योग और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
उन्होंने यह भी बताया कि इस मॉडल के तहत ग्रीन एनर्जी और बायो-केमिकल्स के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ईंधन की खपत कम होगी और पर्यावरण को भी फायदा होगा.
इस दौरान इंडियन पोटाश लिमिटेड की टीम ने इस प्रस्ताव पर विस्तृत प्रस्तुति दी और शुगर सेक्टर की मौजूदा चुनौतियों और संभावित फायदों के बारे में जानकारी दी.
सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव रमन कुमार ने कहा कि महाराष्ट्र सहकारिता के क्षेत्र में पहले से मजबूत राज्य है और यहां इस मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है. उन्होंने इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए NCDC और अन्य संबंधित संस्थाओं की सराहना की. कार्यक्रम में खुली चर्चा भी हुई, जिसमें शुगर मिलों से जुड़े कई सवालों और चिंताओं का समाधान किया गया.