
केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तवर्ष 2025-26 के लिए बजट पेश कर दिया है. बजट में कृषि के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित राशि का प्रावधान किया गया है. यह राशि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 19 हजार करोड़ अधिक है. कृषि इंडस्ट्री की दिग्गज कंपनियों के अधिकारियों ने कृषि के लिए बढ़े बजट और अन्य घोषणाओं को कृषि के विकास के लिए बेहतर बताया है. केसीसी लिमिट में बढ़ोत्तरी, कपास की खेती और दलहन-तिलहन मिशन समेत कई घोषणाओं को किसान और उत्पादन के लिए अच्छा बताया है.
दिग्गज एग्री कंपनी गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक बलराम सिंह यादव ने कहा कि बजट प्रस्तावों में भारत के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक व्यापक रणनीति नजर आ रही है, जो इसे विकसित भारत की ओर हमारी यात्रा में एक प्रमुख चालक के रूप में स्थापित करती है. उच्च उपज वाले, जलवायु के अनुरूप बीज, कपास की उत्पादकता को बढ़ावा देने और दालों में आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण घोषणा के साथ बजट एक बेहतर कृषि-अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत आधार तैयार करता है. संशोधित ब्याज अनुदान योजना के तहत किसान क्रेडिट कार्ड ऋण के लिए 3 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक की बढ़ी हुई ऋण सीमा छोटे मत्स्यपालकों और डेयरी किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी. क्योंकि अब उन्हें अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध हो सकेगी. इससे उन्हें अपने कामकाज को बढ़ाने में मदद मिलेगी. मछली और जलीय कृषि के दूसरे सबसे बड़े वैश्विक उत्पादक के रूप में भारत की स्थिति को बनाए रखने के लिए एक प्रमुख इनपुट सामग्री पर मूल सीमा शुल्क में कमी से इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि दालों और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के लिए बजट का रणनीतिक प्रयास, फलों और सब्जियों के लिए नए एकीकृत कार्यक्रम के साथ मिलकर पोषण सुरक्षा और कृषि स्थिरता दोनों सुनिश्चित करता है.
गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड में क्रॉप प्रोटेक्शन बिजनेस के सीईओ और फिक्की कमेटी ऑन क्रॉप प्रोटेक्शन केमिकल्स के को-चेयरमैन राजावेलु एन.के ने बजट को आत्मनिर्भरता और किसान समृद्धि पर केंद्रित बताया. उन्होंने कहा कि फसल उत्पादकता और सुरक्षा पर सरकार का बढ़ा हुआ ध्यान भारतीय कृषक परिवारों के उत्थान की दिशा में एक आशाजनक कदम है. कपास उत्पादकता मिशन, जो विज्ञान और टेक्नोलॉजी को लंबे रेशे वाली कपास की किस्मों के साथ इंटीग्रेट करता है, घटते कपास क्षेत्रफल का समाधान करता है और किसानों को उनकी पैदावार और मुनाफे को बढ़ाने में मदद करता है. निष्क्रिय यूरिया प्लांट को फिर से खोलने और सब्जी तथा फलों की पहल में एफपीओ को शामिल करने के प्रस्ताव सराहनीय हैं, जो इनपुट और आउटपुट दोनों चुनौतियों का समाधान करते हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना, 100 जिलों में 1.7 करोड़ किसानों को टारगेट करती है, जिसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और कटाई के बाद भंडारण में सुधार करना है.
एग्री वैल्यू चेन कंपनी समुन्नति के संस्थापक और प्रबंध निदेशक अनिल कुमार एसजी ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में कई घोषणाएं इस बात की पुष्टि करती हैं कि कृषि भारत की विकास दृष्टि का एक महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है. 100 कृषि-जिलों के विकास से लेकर हाई उपज वाले बीज, फल और सब्जियों के लिए राष्ट्रीय मिशन की शुरुआत करना स्पष्ट दर्शाता है कि उत्पादकता, प्रतिरोधक क्षमता और किसानों की समृद्धि को बढ़ावा देना मुख्य टारगेट है. जलवायु अनुकूल बीजों, उन्नत ऋण और एफपीओ के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों पर दिया गया जोर छोटे किसानों को सशक्त बनाने के मिशन के अनुरूप है. नई तकनीकों और टिकाऊ प्रथाओं को अपनाकर, भारतीय कृषि क्षेत्र राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को भी मजबूत बना रहा है.
कमोडिटी स्टोरेज और लोन फैसेलिटी देने वाली दिग्गज कंपनी SLCM के ग्रुप सीईओ संदीप सभरवाल ने कहा कि बजट 2025 ने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं, जिनका 1.7 करोड़ किसानों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है. 100 कम प्रदर्शन करने वाले जिलों को टारगेट करने वाले कृषि जिला कार्यक्रम की शुरुआत एक सराहनीय कदम है, जो फसल विविधीकरण, सतत कृषि, और बेहतर सिंचाई पर केंद्रित है. पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसल कटाई के बाद भंडारण को मजबूत करने पर जोर देने से फसल की बर्बादी कम होगी और किसानों के लिए मूल्य प्राप्ति में सुधार होगा. इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की बढ़ी हुई पहुंच के माध्यम से विशेष रूप से ऋण तक बेहतर पहुंच, छोटे और सीमांत किसानों के लिए वित्तीय लिक्विडिटी में सुधार करेगी, जो ग्रामीण उद्यमशीलता को बढ़ावा देगी.
एग्रीटेक कंपनी लीड्स कनेक्ट सर्विसेज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नवनीत रविकर ने कहा कि हमें यह देखकर खुशी हो रही है कि सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए कई पहल की हैं. चाहे वह प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की शुरुआत हो, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से ऋण बढ़ाना हो, उच्च उपज वाले बीजों पर राष्ट्रीय मिशन बनाना हो, कपास उत्पादकता के लिए मिशन बनाना हो, बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना करनी हो या फिर तुअर, उड़द और मसूर पर विशेष ध्यान देने के साथ 6 वर्षीय मिशन की शुरुआत करके दालों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना हो, सरकार ने इस साल के बजट में व्यापक क्षेत्र को कवर किया है. कम उत्पादकता हमेशा से भारतीय कृषि के लिए एक चुनौती रही है और इसलिए सरकार ने खेती में टिकाऊ प्रथाओं को सुनिश्चित करते हुए इससे निपटने के लिए अच्छे कदम उठाए हैं. हालांकि, इन पहलों को अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए कई स्तरों पर बहुत अधिक समन्वय की जरूरत है. इसके अलावा बीमा में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति देने का निर्णय फसल बीमा, आपदा प्रबंधन और जलवायु जोखिम में इनोवेशन को बढ़ावा देगा.
एग्रीटेक सॉल्यूशन कंपनी सत्ययुक्त एनालिटिक्स के फाउंडर और सीईओ डॉ. सत कुमार तोमर ने कहा कि केंद्रीय बजट 2025 टेक्नोलॉजी ऑपरेटेड सॉल्यूशन समाधानों के जरिए भारतीय कृषि को बदलने के लिए सरकार के कमिटमेंट की पुष्टि करता है. बजट में फसल विविधीकरण, सिंचाई सुविधाएं और 1.7 करोड़ किसानों को वित्तीय सहायता शामिल है. यह कदम उत्पादकता और लचीलापन लाने में अहम होंगे. धन धान्य कृषि योजना और खाद्य तेलों और दालों के लिए राष्ट्रीय मिशन जैसी पहल खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी. उन्होंने कहा कि इसके अलावा राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन की घोषणा क्रांतिकारी है, क्योंकि वास्तविक समय के स्थानिक डेटा से कृषि के तहत एक छोटे से क्षेत्र में पानी और इनपुट का आकलन करके सटीक खेती में बदला जा सकता है. जैसे-जैसे हम अपने जलवायु-लचीले भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, सरकारी योजनाओं के साथ एम्बेडेड सैटेलाइट बेस्ड एनालिटिक्स किसानों के लिए जादू की तरह होगा क्योंकि वे टिकाऊ और लाभदायक कृषि पर काम करेंगे. यह बजट इस बात का खुलासा करता है कि कृषि में डिजिटल बदलाव कितना सक्षम है. इस तरह की तकनीक और नीतियां हमारे किसानों के उत्थान के लिए जरूरी हैं.