गोकुल धाम नीति 2025: मध्यप्रदेश में बनेगी 5 हजार गौवंश क्षमता वाली स्वावलंबी गौशालाएं

गोकुल धाम नीति 2025: मध्यप्रदेश में बनेगी 5 हजार गौवंश क्षमता वाली स्वावलंबी गौशालाएं

गोकुल धाम नीति 2025 के तहत मध्यप्रदेश सरकार स्वावलंबी गौशालाओं का विकास करेगी, जहां न्यूनतम 5 हजार गौवंश का पालन अनिवार्य होगा.योजना में 30% दुधारू नस्ल की गायें, डेयरी विकास, जैविक खाद, बायो-CNG और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने पर फोकस किया गया.

धर्मेंद्र सिंह
  • Bhopal ,
  • May 29, 2026,
  • Updated May 29, 2026, 11:29 AM IST

मध्यप्रदेश सरकार ने निराश्रित गौवंश के संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए “मध्यप्रदेश स्वावलंबी गौशाला (गोकुल धाम) स्थापना नीति 2025” को तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है. पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में नीति के तहत प्राप्त प्रस्तावों और योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की.

राज्यमंत्री ने बताया कि नई नीति के अंतर्गत स्थापित होने वाली प्रत्येक गौशाला में कम से कम 5 हजार गौवंश का पालन अनिवार्य होगा. इनमें 30 प्रतिशत दुधारू नस्ल की गायों को शामिल करना जरूरी रहेगा, ताकि दुग्ध उत्पादन और डेयरी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके.

भूमि और अनुदान का प्रावधान

सरकार की ओर से प्रत्येक 5 हजार गौवंश के लिए अधिकतम 125 एकड़ शासकीय भूमि उपयोग अधिकार के आधार पर उपलब्ध कराई जाएगी. वहीं अतिरिक्त 1000 गौवंश पर 25 एकड़ अतिरिक्त भूमि और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 5 एकड़ अतिरिक्त भूमि देने का प्रावधान भी रखा गया है.

निराश्रित गौवंश के रखरखाव के लिए राज्य सरकार प्रति गौवंश प्रतिदिन 40 रुपये की अनुदान राशि भी दे रही है.

डेयरी, जैविक खाद और बायो-CNG को बढ़ावा

राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि यह नीति केवल गौशालाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्हें स्वावलंबी आर्थिक मॉडल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके तहत दुग्ध उत्पादन, दुग्ध प्रसंस्करण, पंचगव्य उत्पाद, जैविक खाद, बायो-CNG, औषधीय उत्पाद और ग्रामीण पर्यटन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा.

उन्होंने बताया कि गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी उन्नत नस्लों के संवर्धन के साथ कृत्रिम गर्भाधान और सेक्सड सॉर्टेड सीमेन तकनीक का उपयोग कर दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना है.

नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन पर फोकस

नीति के तहत बायोगैस-CNG और सोलर ऊर्जा संयंत्रों को भी बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार की योजना प्राकृतिक और रमणीय स्थलों पर विकसित गौशालाओं को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की है, जहां गौ-प्रबंधन और डेयरी प्रोसेसिंग गतिविधियों का प्रदर्शन किया जाएगा.

14 स्थलों के लिए मिले प्रस्ताव

बैठक में रायसेन, दमोह, जबलपुर, सागर, अशोकनगर, खरगोन, रीवा, बैतूल, पन्ना, भिंड, राजगढ़, भोपाल और मंडला जिलों में उपलब्ध जमीनों की जानकारी प्रस्तुत की गई.अधिकारियों के अनुसार अब तक 14 स्थलों के लिए प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और 16 निवेशकों ने रुचि दिखाई है.

प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए कुल 3,457 एकड़ भूमि और लगभग 1.30 लाख गौवंश क्षमता का लक्ष्य तय किया गया है.

बैठक में प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी उमाकांत उमराव, संचालक डॉ. पी.एस. पटेल, गौसंवर्धन बोर्ड के रजिस्ट्रार डॉ. अनुपम अग्रवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे.

 

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