Natural Farming करने वाले किसानों के लिए अच्‍छी खबर, CM सुक्‍खू ने अफसरों काे दिए ये निर्देश

Natural Farming करने वाले किसानों के लिए अच्‍छी खबर, CM सुक्‍खू ने अफसरों काे दिए ये निर्देश

प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है. मुख्यमंत्री सुक्खू ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि किसानों का पूरा डेटा पोर्टल से जोड़ा जाए और उनकी फसलों की खरीद और ब्रांडिंग को और मजबूत किया जाए. हमीरपुर में होने वाला सम्मेलन कई संकेत देता है.

Himachal Natural FarmersHimachal Natural Farmers
प्रतीक जैन
  • Noida,
  • Jan 14, 2026,
  • Updated Jan 14, 2026, 1:17 PM IST

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू इस माह हमीरपुर में प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों से सीधे बातचीत करेंगे. इससे पहले उन्होंने कृषि विभाग को प्राकृतिक खेती करने वाले सभी किसानों का पूरा डेटा 20 जनवरी 2026 तक हिम परिवार पोर्टल से जोड़ने के लिए कहा है. राज्‍य सरकार चाहती है कि प्राकृतिक खेती से जुड़े हर किसान, उसकी फसल और भुगतान से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो, ताकि योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जा सके.

शिमला में कृषि विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों का ब्लॉक स्तर पर आधार आधारित डेटा तैयार किया जाएगा और उसकी मैपिंग की जाएगी. इससे यह पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र में कौन सी फसल प्राकृतिक तरीके से उगाई जा रही है और किसानों को इसका कितना लाभ मिल रहा है.

प्राकृतिक खेती से बेहतर आमदनी संभव

उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्राकृतिक खेती को एक अहम माध्यम मानती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को खेती से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है और प्राकृतिक खेती इसमें बड़ी भूमिका निभा सकती है. इस पद्धति में लागत कम होती है और किसानों को बेहतर आमदनी मिलने की संभावना रहती है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती आधारित व्यवस्था में बड़े और ठोस बदलाव करना चाहती है, ताकि किसान लंबे समय तक इससे जुड़े रहें.

प्राकृतिक उत्‍पादों की खरीद-बिक्री की समीक्षा की

बैठक में प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की खरीद और बिक्री की स्थिति की भी समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक खेती से उगाए गए गेहूं, मक्की और कच्ची हल्दी को अब बाजार में अलग पहचान के साथ उतारा गया है. गेहूं के आटे को ‘हिम चक्की आटा’, मक्की के आटे को ‘हिम भोग मक्की’ और कच्ची हल्दी को ‘हिम हल्दी’ के नाम से बेचा जा रहा है. उन्होंने निर्देश दिए कि इन उत्पादों की पैकिंग पर एक्सपायरी डेट साफ तौर पर लिखी जाए. साथ ही, यह भी बताया जाए कि इनमें पोषण की क्या विशेषताएं हैं. इसके लिए एक विशेष इकाई गठित करने के निर्देश भी दिए गए हैं.

सरकार ने इन उत्‍पादों को MSP पर खरीदा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्राकृतिक खेती से उगाई गई 606.8 मीट्रिक टन मक्की की खरीद की जा चुकी है. इसके बदले 2.31 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में भेजे गए हैं. इसी तरह प्राकृतिक खेती से उत्पादित 2123 क्विंटल गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद की गई है, जिसके लिए 1 करोड़ 31 लाख 57 हजार रुपये डीबीटी के माध्यम से किसानों को दिए गए हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक तरीके से उगाई गई कच्ची हल्दी पर 90 रुपये प्रति किलो का समर्थन मूल्य तय किया गया है, जिसके अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं. इस साल 1629 किसानों से करीब 2422 क्विंटल कच्ची हल्दी की खरीद का अनुमान है. उन्होंने बताया कि कृषि विभाग प्रदेश के 25 फार्मों में खुद प्राकृतिक खेती पद्धति से विभिन्न फसलों का उत्पादन कर रहा है, ताकि किसानों को प्रशिक्षण और व्यावहारिक जानकारी मिल सके.

मार्केटिंग पर खास ध्‍यान देने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती के उत्पादों के बेहतर मार्केटिंग पर खास ध्यान दिया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके. बैठक में कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए. इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, महाधिवक्ता अनूप रतन, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव सी. पालरासु और आशीष सिंहमार सहित कृषि और बागवानी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

MORE NEWS

Read more!