Himachal Pradesh में ‘गोपाल योजना’ के तहत 14.68 करोड़ जारी, आवारा मवेशियों से किसानों को राहत

Himachal Pradesh में ‘गोपाल योजना’ के तहत 14.68 करोड़ जारी, आवारा मवेशियों से किसानों को राहत

Shimla में सरकार ने ‘गोपाल योजना’ के तहत 14.68 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिससे आवारा और बेसहारा मवेशियों की देखभाल और किसानों को फसल नुकसान से राहत मिल सके.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Apr 06, 2026,
  • Updated Apr 06, 2026, 1:55 PM IST

शिमला में अधिकारियों ने रविवार को बताया कि आवारा और बेसहारा मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए, हिमाचल प्रदेश सरकार ने 'गोपाल योजना' के तहत 14.68 करोड़ रुपये का रखरखाव अनुदान जारी किया है. इसका उद्देश्य पूरे राज्य में छोड़ी गई और बेसहारा गायों की उचित देखभाल और आश्रय मुहैया करना है.

एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा, "आवारा मवेशियों से पैदा होने वाली गंभीर चुनौतियों, विशेष रूप से खड़ी फसलों को होने वाले नुकसान को देखते हुए, सरकार ने इस मुद्दे को हल करने को उच्च प्राथमिकता दी है."

बेसहारा पशुओं से नुकसान

"राज्य के कई हिस्सों में किसानों को फसल बर्बाद होने के कारण भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था, और कुछ क्षेत्रों में स्थिति ऐसी हो गई थी कि उन्हें अपनी खेती के काम को कम करना पड़ा या पूरी तरह छोड़ देना पड़ा."

"मवेशियों की देखभाल को मजबूत करने की एक बड़ी नीतिगत पहल के तहत, रजिस्टर्ड गौशालाओं और अभयारण्यों में गायों के रखरखाव के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता में काफी वृद्धि की गई है."

अधिकारियों के अनुसार, 1 अक्टूबर, 2025 से प्रभावी, मासिक अनुदान को प्रति गाय 700 रुपये से बढ़ाकर 1,200 रुपये कर दिया गया है.

प्रवक्ता ने बताया कि यह बढ़ी हुई सहायता 'हिमाचल प्रदेश गौ सेवा आयोग' के माध्यम से बांटी जा रही है, ताकि जानवरों के लिए बेहतर प्रबंधन, बेहतर पोषण और उचित स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित की जा सके.

गौसदन बनाने पर जोर

उन्होंने यह भी कहा कि आवारा मवेशियों का उचित पुनर्वास न केवल किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करेगा और उन्हें खेती की गतिविधियां फिर से शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करेगा, बल्कि इससे सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा, क्योंकि सड़क दुर्घटनाओं की एक बड़ी संख्या आवारा मवेशियों के कारण ही होती है.

प्रवक्ता ने कहा, "हाल के वर्षों में, राज्य सरकार ने कई गौ अभयारण्य और बड़े गौसदन बनाए हैं. सरकार ने स्वैच्छिक संगठनों, NGOs और व्यावसायिक घरानों को इन्हें गोद लेने की अनुमति देने का निर्णय लिया है."

उन्होंने आगे कहा कि इसके अलावा, वित्तीय वर्ष 2027 के लिए राज्य के बजट में आवारा मवेशियों के पुनर्वास के लिए कई उपायों का प्रस्ताव भी रखा गया है.

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