PM-किसान और नमो शेतकरी योजना में बदलाव की मांग, प्याज किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी

PM-किसान और नमो शेतकरी योजना में बदलाव की मांग, प्याज किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी

महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक किसानों ने PM-किसान और नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना के नियमों में बदलाव की मांग उठाई है. किसानों का कहना है कि 2019 के बाद जमीन खरीदने, विरासत में पाने या पारिवारिक बंटवारे के जरिए खेती करने वाले वास्तविक किसानों को भी इन योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए.

The opposition Maha Vikas Aghadi (MVA) has seized the opportunity to criticise the Mahayuti government, particularly over the low prices for soybean, which affect more farmers than onions.The opposition Maha Vikas Aghadi (MVA) has seized the opportunity to criticise the Mahayuti government, particularly over the low prices for soybean, which affect more farmers than onions.
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jul 04, 2026,
  • Updated Jul 04, 2026, 5:17 PM IST

हाराष्ट्र के प्याज उत्पादक किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना के नियमों में बदलाव की मांग की है. किसानों का कहना है कि 2019 के बाद खरीद, विरासत या परिवार में जमीन के बंटवारे के जरिए खेती की जमीन हासिल करने वाले असली किसानों को भी इन योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए. किसानों ने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो राज्यभर में आंदोलन किया जाएगा.

'असली किसान' को बनाया जाए पात्रता का आधार

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ का कहना है कि वर्तमान नियमों के कारण बड़ी संख्या में ऐसे किसान योजनाओं से बाहर हैं, जो वास्तव में खेती कर रहे हैं और खेती का पूरा खर्च खुद उठा रहे हैं. प्याज उत्पादक संघ की मांग है कि पात्रता तय करते समय जमीन के रिकॉर्ड की तारीख के बजाय 'असली किसान' यानी वास्तविक रूप से खेती करने वाले व्यक्ति को आधार बनाया जाए.

रुकी हुई सभी किस्तें जारी करने की मांग

संघ ने सरकार से मांग की है कि 2019 के बाद कानूनी रूप से जमीन खरीदने, विरासत में पाने या परिवार में बंटवारे के जरिए जमीन हासिल करने वाले सभी पात्र किसानों को PM-किसान और नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना में शामिल किया जाए. साथ ही, ऐसे किसानों की अब तक रुकी हुई सभी किस्तें भी जल्द जारी की जाएं. इसके अलावा, छूटे हुए किसानों की पहचान के लिए विशेष रजिस्ट्रेशन और सत्यापन अभियान चलाने की भी मांग की गई है.

'तकनीकी नियमों की वजह से नहीं मिल रही सहायता'

संघ के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले ने कहा कि पात्रता नियमों में बदलाव समय की जरूरत है, ताकि हर वास्तविक किसान को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके. वहीं, राज्य कोर कमेटी के सदस्य और नासिक जिला अध्यक्ष जयदीप भदाणे ने कहा कि किसान बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, बिजली, डीजल और मजदूरी सहित खेती का पूरा खर्च उठाते हैं. इसके बावजूद केवल इसलिए उन्हें सहायता नहीं मिल रही क्योंकि उनके नाम जमीन का रिकॉर्ड 2019 के बाद दर्ज हुआ है.

देशभर के लाखों किसानों से जुड़ा है मामला

संघ का कहना है कि यह केवल महाराष्ट्र का नहीं, बल्कि देशभर के लाखों किसान परिवारों का मुद्दा है. कई किसानों ने कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन खरीदी है या विरासत और पारिवारिक बंटवारे के जरिए जमीन हासिल की है. वे लगातार खेती कर रहे हैं और देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, लेकिन तकनीकी शर्तों के कारण सरकारी योजनाओं से वंचित हैं. संघ ने कहा है कि जल्द ही अपनी मांगों का ज्ञापन केंद्र और राज्य सरकार को सौंपा जाएगा. यदि नियमों में बदलाव नहीं किया गया तो राज्यभर में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा. (PTI)

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