
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने और किसानों तक कम लागत में पर्याप्त पानी पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिंचाई और जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए हैं कि किसानों के समूह बनाकर सामूहिक टैंक तैयार किए जाएं और इन्हें माइक्रो इरिगेशन प्रणाली से जोड़ा जाए. राज्य सरकार का लक्ष्य है कि सीमित जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए अधिक से अधिक खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाया जाए.
आज चंडीगढ़ में हरियाणा विजन-2047 के तहत सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की पांच वर्षीय कार्ययोजना की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 एकड़ या उससे अधिक जमीन वाले किसान समूहों के लिए सामूहिक टैंक बनाए जाएंगे. इन टैंकों को नहरों के पानी से भरा जाएगा और उनसे जुड़े खेतों में टपका सिंचाई और फव्वारा सिंचाई जैसी माइक्रो इरिगेशन तकनीक लागू की जाएगी. सरकार इन टैंकों के निर्माण पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी देगी, ताकि किसानों पर आर्थिक बोझ कम पड़े.
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में पारंपरिक सिंचाई व्यवस्था से आगे बढ़कर पानी बचाने वाली तकनीकों को अपनाना जरूरी होगा. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ अवधारणा को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जाएं. उन्होंने कहा कि खेतों में खुले पानी से सिंचाई करने से पानी की बर्बादी होती है, जबकि माइक्रो इरिगेशन के जरिए कम पानी में ज्यादा क्षेत्र की सिंचाई संभव है.
राज्य सरकार ने शुरुआत में प्रदेश के नौ जिलों - भिवानी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, नूंह, रेवाड़ी, हिसार, झज्जर और सिरसा को इस योजना के लिए चुना है. इन जिलों में किसानों के समूह बनाकर सामूहिक टैंक तैयार किए जाएंगे. टैंकों तक नहरों से पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाया जाएगा और वहां सोलर पैनल भी लगाए जाएंगे. इससे किसानों को सिंचाई के लिए बिजली और पानी की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस साल से गन्ना और कपास जैसी फसलों में माइक्रो इरिगेशन का इस्तेमाल बढ़ाया जाए. उन्होंने कहा कि इससे पानी की बचत होगी और किसानों का खर्च भी घटेगा. सरकार की कोशिश है कि किसान ट्यूबवेल और महंगे बोरवेल पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक सिंचाई प्रणाली अपनाएं. इससे भूजल दोहन पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी.
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि चयनित जिलों के पूरे गांवों को माइक्रो इरिगेशन प्रणाली से जोड़ा जा सकता है. इसके लिए सरकार आधुनिक तकनीक वाली कंपनियों की मदद लेने पर भी विचार कर रही है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस दिशा में तेजी से टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि किसानों को जल्द लाभ मिल सके. उन्होंने इजराइल जैसे देशों में अपनाई जा रही आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों का अध्ययन करने के भी निर्देश दिए.
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की नहरों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए उनकी मरम्मत और पुनर्निर्माण की योजना तैयार करने को कहा. उन्होंने निर्देश दिए कि विभाग हर महीने पानी बचत और किसानों को हुए लाभ की रिपोर्ट तैयार करे. सरकार चाहती है कि सिंचाई व्यवस्था में होने वाली पानी की बर्बादी को कम किया जाए और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो.
बैठक में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि माइक्रो इरिगेशन क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की कमी है. इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की सभी आईटीआई में माइक्रो इरिगेशन से जुड़ी नई ट्रेड शुरू की जाए. इससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और किसानों को तकनीकी सहायता भी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी.
मुख्यमंत्री ने सिंचाई और कृषि विभाग को संयुक्त रूप से किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि किसानों को यह समझाना जरूरी है कि वे लाखों रुपये खर्च कर बोरिंग कराने के बजाय सरकार की सब्सिडी वाली योजनाओं का लाभ उठाएं. इसके साथ ही सीवरेज के शोधित पानी को भी कृषि सिंचाई में उपयोग करने पर जोर दिया गया है, ताकि जल संरक्षण को बढ़ावा मिल सके.